नई दिल्ली। No confidence motion against CEC: विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में सौंप दिया है। सूत्रों के मुताबिक इस नोटिस पर लोकसभा के लगभग 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।
एक वरिष्ठ सांसद के अनुसार हस्ताक्षर करने वालों में इंडिया गठबंधन के लगभग सभी घटक दलों के सांसद शामिल हैं। आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी इस पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि पार्टी अब औपचारिक रूप से विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं है, फिर भी उसने इस पहल का समर्थन किया है। कुछ निर्दलीय सांसदों के भी नोटिस पर हस्ताक्षर करने की जानकारी मिली है।
नियमों के अनुसार लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देने के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं, जबकि राज्यसभा में इसके लिए न्यूनतम 50 सांसदों का समर्थन होना चाहिए।
विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर कई मौकों पर सत्तारूढ़ भाजपा के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया है। खासकर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल भाजपा को चुनावी लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।
संविधान के प्रावधानों के अनुसार मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में दिया जा सकता है। इसे पारित कराने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है यानी सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई मत होना जरूरी है।
सूत्रों के मुताबिक इस पहल की शुरुआत तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने की थी। पार्टी ने अन्य विपक्षी दलों को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए सहमत किया। इससे पहले टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने कहा था कि उनकी पार्टी संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव लाएगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं को संदेह के दायरे में डाल दिया गया है। रॉय का दावा था कि करीब 59 लाख मतदाताओं को एडजुडिकेशन लिस्ट में रखा गया है जो बेहद बड़ी संख्या है और इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।

