नई दिल्ली। Indus Water Treaty: पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच से एक बार फिर कश्मीर और पानी का मुद्दा उठाया है। भारत द्वारा ‘सिंधु जल संधि’ (IWT) को स्थगित करने के फैसले को पाकिस्तान ने अपनी जल सुरक्षा के लिए एक अभूतपूर्व संकट बताया है। पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि निलंबित कर दी थी।
संयुक्त राष्ट्र में ‘ग्लोबल वाटर बैंकरप्सी पॉलिसी राउंडटेबल’ को संबोधित करते हुए, पाकिस्तान के कार्यवाहक स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत उस्मान जादून ने भारत पर गंभीर आरोप लगाए। जादून ने कहा कि पिछले साल अप्रैल में भारत द्वारा 1960 की संधि को निलंबित करने के निर्णय ने पाकिस्तान की जल सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल दिया है।
पाकिस्तानी राजदूत ने आरोप लगाया कि भारत ने न केवल पानी के बहाव में बाधा डाली है, बल्कि महत्वपूर्ण हाइड्रोलॉजिकल डेटा (जल स्तर से जुड़ी जानकारी) देने से भी इनकार कर दिया है। जादून ने भारत पर पानी का हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और दावा किया कि संधि कानूनी रूप से अभी भी लागू है और इसे एकतरफा निलंबित नहीं किया जा सकता।
भारत ने यह कदम पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के जवाब में उठाया था। इस हमले में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने 26 नागरिकों की हत्या कर दी थी। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कूटनीतिक और रणनीतिक उपाय लागू किए। भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सिंधु जल संधि को आतंकवाद और शत्रुतापूर्ण व्यवहार से अलग नहीं रखा जा सकता। भारत का कहना है कि दशकों तक उसने संधि का पालन किया, लेकिन पाकिस्तान ने भारत की चिंताओं को लगातार नजरअंदाज किया और सीमा पार से आतंकवाद जारी रखा।
सिंधु जल संधि (1960) क्या है?
यह संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे को लेकर हुई थी। इसके तहत नदियों को दो भागों में बांटा गया था:
- पश्चिमी नदियां (पाकिस्तान के हिस्से): सिंधु, झेलम और चिनाब।
- पूर्वी नदियां (भारत के हिस्से): रावी, ब्यास और सतलज।
इस संधि के तहत, सिंधु नदी प्रणाली का लगभग 80% पानी पाकिस्तान को मिलता है, जबकि भारत के पास केवल 20% उपयोग का अधिकार है। इसके बावजूद, पाकिस्तान अक्सर भारत की उन जल परियोजनाओं पर भी आपत्ति जताता रहा है जो संधि के नियमों के तहत बनाई जा रही थीं।
पाकिस्तान की आंतरिक जल समस्याएं
अपने संबोधन में उस्मान जादून ने पाकिस्तान के आंतरिक जल संकट को भी स्वीकार किया। उन्होंने माना कि पाकिस्तान एक लोअर-रिपेरियन (निचले प्रवाह वाला) देश है जो गंभीर जलवायु तनाव का सामना कर रहा है।
जहां एक ओर पाकिस्तान भारत के फैसले को संकट बताकर अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहा है, वहीं भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जब तक सीमा पार से आतंकवाद बंद नहीं होता, तब तक संधियों का सामान्य रूप से चलना संभव नहीं है।

