सही सोच, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी: नितिन विजय

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म्यूजिक, मस्ती और भावनाओं से भरपूर रहा मोशन एजुकेशन का महा ओरिएंटेशन

कोटा। मोशन एजुकेशन के फाउंडर और जाने-माने एजुकेटर नितिन विजय ने कहा कि सफल होना चाहते हो तो अपनी सोच बदलो। सही सोच, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास से ही सफलता की राह बनती है।

वे मंगलवार शाम मोशन एजुकेशन के द्रोणा-2 कैम्पस में जेईई और नीट के विद्यार्थियों के लिए आयोजित महा ओरिएंटेशन प्रोग्राम को संबोधित कर रहे थे। ओरिएंटेशन में हजारों छात्र-छात्राओं और अभिभावकों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाना, लक्ष्य के प्रति स्पष्टता देना और उन्हें सफलता के लिए सही दिशा दिखाना रहा। कार्यक्रम में म्यूजिकल बैंड ने देशभक्ति और प्रेरक गीतों से विद्यार्थियों में नई ऊर्जा भर दी।

कार्यक्रम की शुरुआत नेशनल एंथम से हुई। नितिन विजय ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे खुद को वर्तमान अंकों से न आंकें और अपने दिमाग को नई सोच के साथ “रीवायर” करें। उन्होंने खासतौर पर छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि लड़कियों के लिए हालात अभी भी पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं।

इंजीनियरिंग में लड़कियों की भागीदारी 20 प्रतिशत से भी कम और सर्जरी में सिर्फ 12.5 प्रतिशत है। यह सोच बदलने का समय है। शकुंतला देवी का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि मैथ्स और फिजिक्स में कमजोर समझी जाने वाली लड़कियां भी दुनिया में नाम कमा सकती हैं। देश की 87.6 प्रतिशत एथलीट्स महिलाएं हैं और नासा में 35.5 प्रतिशत महिलाएं काम कर रही हैं।

नितिन विजय ने कहा कि भारतीय बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। सही माहौल मिलने पर हर बच्चा आगे बढ़ सकता है। उन्होंने उदाहरण दिया कि स्पेल बी प्रतियोगिताओं में 80 प्रतिशत स्टूडेंट्स भारतीय मूल के होते हैं। उन्होंने देशभक्ति पर जोर देते हुए विद्यार्थियों को देश को सर्वोपरि रखने की शपथ दिलाई।

उन्होंने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। मेहनत और निरंतरता ही असली ताकत है। कछुए और खरगोश की कहानी से उन्होंने समझाया कि गति के साथ निरंतरता भी जरूरी है। कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर संघर्ष से प्यार करना सीखो। उन्होंने विद्यार्थियों को रोज़ की दिनचर्या में नींद, पढ़ाई और फ्री टाइम के बीच संतुलन बनाने और माता-पिता की नियमितता से सीख लेकर खुद में अनुशासन लाने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि लक्ष्य बड़े दिखने चाहिए, लेकिन असली फोकस रोज़ की तीन घंटे की ईमानदार पढ़ाई पर होना चाहिए। नॉर्थ पोल अभियान और लकड़हारे की कहानी से उन्होंने निरंतर प्रयास की अहमियत समझाई। उन्होंने गलतियों से सीखने, दूसरों के अनुभवों से प्रेरणा लेने और आत्मनिरीक्षण पर जोर देते हुए कहा कि मोबाइल फोन से ज्यादा हमें खुद को समझने की जरूरत है।

सही मेंटर चुनो, अपनी कमजोरियों को पहचानो और रोज़ एक प्रतिशत सुधार करो। सचिन तेंदुलकर, स्टीव जॉब्स और नाथन मिलस्टीन के उदाहरण देकर उन्होंने बताया कि बड़ी सोच के साथ अभ्यास भी जरूरी है।

अंत में छात्रों ने अपने लक्ष्य के प्रति संकल्प लिया। अभिभावकों और विद्यार्थियों ने कार्यक्रम को प्रेरणादायक बताया। स्टूडेंट्स और पेरेंट्स ने कहा कि इस ओरिएंटेशन के दौरान उन्हें न सिर्फ पढ़ाई की दिशा मिली, बल्कि जीवन को देखने का नजरिया भी बदला।