कोटा। वन विभाग, पगमार्क फाउंडेशन, शेर संस्था और प्रो. विनोद महोबिया सर्प एवं संरक्षण संस्था के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय “नेशनल वर्कशॉप ऑन स्नेक इकोलॉजी एंड कंजर्वेशन” का सोमवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया।
समापन सत्र में वन्यजीव डिवीजन कोटा के डीएफओ अनुराग भटनागर मुख्य अतिथि रहे, जिन्होंने प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट वितरित किए और उन्हें ‘संरक्षण दूत’ बनने का आह्वान किया।
समापन दिवस की शुरुआत भी फील्ड विजिट के साथ हुई, जहाँ सभी प्रतिभागियों को चंद्रलोई नदी के किनारे स्थित चंद्रसाल मठ ले जाया गया। विशेषज्ञों ने चंद्रलोई नदी क्षेत्र में मगरमच्छों के व्यवहार और उनके आवास पर गहन चर्चा की।
प्रो. विनोद महोबिया सर्प एवं संरक्षण संस्था के प्रमुख प्रो. विनोद महोबिया ने कहा कि हमारा यह अनुरोध है कि कोटा में स्नेक पार्क का ढांचा तैयार है, इसे तुरंत शुरू किया जाना चाहिए। यह केवल हमारा आग्रह नहीं है, यह जनहित में आवश्यक है। यह पार्क न सिर्फ भारत में सर्पदंश से होने वाली मौतों पर रिसर्च का केंद्र बनेगा, बल्कि स्कूली बच्चों के लिए जागरूकता का सबसे बड़ा माध्यम भी साबित होगा।
पगमार्क फाउंडेशन के अध्यक्ष देवव्रत सिंह हाड़ा ने कहा कि हमने भैंसरोड़गढ़ में क्रोकोडाइल और ओटर्स को देखा और अभेड़ा में ‘वाइल्ड वर्सेस कैप्टिव’ मैनेजमेंट समझा। मेरा स्पष्ट मत है कि एक रेस्क्यूअर को केवल साँप पकड़ना नहीं, बल्कि यह समझना भी आना चाहिए कि किस प्रजाति को किस ‘माइक्रो-हैबिटेट’ में रिलीज करना सुरक्षित है। रेस्क्यू को ‘एजुकेशन’ से जोड़कर ही मानव-सर्प संघर्ष कम होगा।
शेर संस्था के डॉ. कृष्णेन्द्र सिंह नामा ने व्यावहारिक प्रशिक्षण के महत्व पर जोर दिया कहा कि किताबों में पढ़ना और जंगल में उसे प्रत्यक्ष देखना—इन दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है। तीन दिनों में फील्ड वर्क और वैज्ञानिक डेटा तैयार करने के तरीकों पर जोर दिया गया। हमारा उद्देश्य है कि रेस्क्यूअर्स वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं ताकि संरक्षण की नीतियां केवल शोध और तथ्यों पर आधारित हों।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि डीएफओ अनुराग भटनागर ने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “भारत में हर साल 50,000 से अधिक मौतें सर्पदंश से होती हैं। यह आंकड़ा जागरूकता की कमी को दर्शाता है। अब आप सभी संरक्षण के ‘शिक्षादूत’ हैं। आप जहाँ भी जाएंगे, समाज को वैज्ञानिक ज्ञान से लैस करेंगे और ‘सह-अस्तित्व’ को बढ़ावा देंगे।
कार्यशाला की सफलता
तीन दिवसीय इस कार्यशाला में 7 राज्यों के विशेषज्ञों, वन विभाग के अधिकारियों और शोधार्थियों ने भाग लिया, जिसने कोटा को राष्ट्रीय स्तर पर वन्यजीव शिक्षा के केंद्र के रूप में स्थापित किया।

