सरकार ने महिला आरक्षण पर चर्चा के लिए बुलाया तीन दिनों का विशेष संसद सत्र

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नई दिल्ली। विधानसभा चुनावों के बीच संसद के दोनों सदनों में महिला आरक्षण पर चर्चा हो सकती है। सरकार विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। यह सत्र तीन दिनों का होगा।

संसद में महिला आरक्षण विधेयक लागू करने के लिए लोकसभा में सीटें बढ़ाने के उद्देश्य से एक विधेयक लाने के संकेतों के बीच, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को राज्यसभा को सूचित किया कि सदन की बैठक आज स्थगित होगी और जल्द ही ‘बहुत महत्वपूर्ण’ विधेयक के लिए पुन: बैठक होगी। बताया जा रहा है कि महिला आरक्षण को लेकर 16, 17 और 18 अप्रैल तक चलने वाले इस सत्र में चर्चा होगी।

असल में, उच्च सदन में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकार की योजना के बारे में सवाल किया था। इसके जवाब में रिजिजू ने कहा कि राज्यसभा में आज आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक और जन विश्वास (धारा संशोधन) विधेयक को पारित करने के लिया जाएगा। संसद के बजट सत्र के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, बजट सत्र के दूसरे चरण का आज अंतिम दिन है।

संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि हमारे पास कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, यह विपक्ष के साथ भी साझा किया गया है। अगले 2-3 हफ्तों में हम एक बहुत महत्वपूर्ण विधेयक लाने वाले हैं। आज सरकार सदन को स्थगित करने का प्रस्ताव रखेगी और हम जल्द ही फिर मिलेंगेछ उद्देश्य सदस्यों को ज्ञात है।

लोकसभा की सीट 546 से बढ़कर 861 होंगी
सरकार महिलाओं के आरक्षण कानून को लागू करने के लिए और लोकसभा की सीटों को 546 से बढ़ाकर 861 करने के उद्देश्य से जनगणना से संबद्ध परिसीमन को अलग करने के लिए दो विधेयक लाने की खातिर विपक्ष के साथ बातचीत कर रही है।

विपक्ष ने लगाया आरोप

  • कांग्रेस के जयराम रमेश ने कहा कि सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाएगी और विपक्ष की मांग है कि यह बैठक 29 अप्रैल को विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद बुलाई जाए। इस पर रिजिजू ने कहा कि सरकार देश की महिलाओं के साथ किए गए वादे को पूरा करने के लिए बाध्य है।
  • उच्च सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कांग्रेस महिलाओं के लिए आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन प्रस्तावित विधेयक महत्वपूर्ण हैं और इनके दीर्घकालिक परिणाम होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव के समय विधेयक लाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।
  • रिजिजू ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। राजद के मनोज कुमार झा ने कहा कि उनकी पार्टी की ‘कोटे के अंदर कोटे की’ मांग बरकरार है।