सरकार ने पीली मटर पर आयात शुल्क लगाया, 1 नवम्बर से प्रभावी होगा

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10 % मानक सीमा शुल्क तथा 20% एआईडीसी शुल्क लगाने का निर्णय

नई दिल्ली। उम्मीद के अनुरूप त्यौहारी सीजन समाप्त होने के तत्काल बाद सरकार ने पीली मटर पर आयात शुल्क लगाने की घोषणा कर दी। मालूम हो कि इसके लिए सरकार पर चौतरफा दबाव पड़ रहा था।

उद्योग-व्यापार एवं कृषक संगठनों के साथ-साथ नीति आयोग कृषि लागत एवं मूल्य आयोग तथा कृषि मंत्री भी पीली मटर पर आयात शुल्क लगाए जाने के पक्ष में थे। त्यौहारी सीजन के कारण सरकार कोई निर्णय लेने से हिचक रही थी।

केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा भारतीय राजपत्र (इंडिया गजट) में जारी अधिसूचना के अनुसार पीली मटर पर 10 प्रतिशत का मानक सीमा शुल्क तथा 20 प्रतिशत का एआईडीसी शुल्क लगाने का निर्णय लिया गया है जो 1 नवम्बर 2025 से प्रभावी हो जाएगा।

इसका मतलब यह हुआ कि 1 नवम्बर या उसके बाद पीली मटर के लिए होने वाले आयात अनुबंध पर शुल्क लागू होगा जबकि उससे पूर्व यानी 31 अक्टूबर 2025 तक के लिए बिल ऑफ लेडिंग पर कोई सीमा शुल्क नहीं लगेगा। ध्यान देने की बात है कि पहले 31 मार्च 2026 तक पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की स्वीकृति दी गई थी।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पीली मटर का भाव लुढ़ककर काफी नीचे आ गया है और भारत में सीमा शुल्क से छूट के कारण विदेशों से इसके विशाल सस्ते आयात की संभावना बनी हुई थी। पिछले साल भी इसका अत्यन्त विशाल आयात हुआ था जिससे घरेलू बाजार में विभिन्न दलहनों की कीमतों में नरमी का दौर शुरू हो गया था।

यह सिलसिला अब भी जारी है जिससे भारतीय किसानों को अपने उत्पादों का लाभप्रद मूल्य हासिल करने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं बल्कि पीली मटर का शुल्क आयात यदि आगे भी जारी रहता है तो रबी कालीन दलहन फसलों की बिजाई पर प्रतिकूल असर पड़ सकता था।

हालांकि पिछले साल- तुवर, उड़द एवं देसी चना के साथ-साथ मसूर का भी भारी आयात हुआ था जिससे दलहनों का कुल आयात उछलकर 73.40 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था मगर कीमतों में नरमी के लिए मुख्यतः पीली मटर ही जिम्मेदार मानी गई।

आगामी समय में दलहनों के घरेलू बाजार मूल्य में कुछ सुधार आने की उम्मीद की जा रही है जबकि चना, मसूर एवं मटर की बिजाई के लिए भी किसानों को अच्छा प्रोत्साहन मिल सकता है। पीली मटर का आयात मुख्यतः कनाडा एवं रूस से हो रहा है।