सरकारी खरीद शुरू होने से कई राज्यों में गेहूं के भाव में गिरावट रही

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे बड़े उत्पादक राज्यों की मंडियों में नए गेहूं की आवक लगातार बढ़ रही है, जहाँ सरकारी खरीद पहले ही शुरू हो चुकी है। इस वजह से, कीमतों में नॉर्मल उतार-चढ़ाव दिख रहा है। जहाँ कुछ मंडियों में कमजोरी का ट्रेंड दिख रहा है, वहीं दूसरी मंडियों में कीमतों में कभी-कभी मजबूती देखी जा रही है।

21-27 मार्च के सप्ताह के दौरान, दिल्ली में गेहूं की कीमतें 55 प्रतिशत बढ़कर 2600-2640 रुपए प्रति क्विंटल हो गईं। डबरा में, कीमतें 75 प्रतिशत बढ़कर 2175-2350 रुपए प्रति क्विंटल हो गई । इटारसी में वे 2350 रुपए प्रति क्विंटल गिर गए, और मैनपुरी में वे गिर गए। जालना में 50 रुपए की गिरावट आई। इंदौर में, गेहूं की कीमतें 50 रुपए से गिरकर 120 से 2200-2280 रुपए प्रति क्विंटल हो गईं, गोरखपुर में वे 100 से 40 प्रति क्विंटल तक गिर गए।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि ज़्यादातर मंडियों में गेहूं की कीमतें मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) से नीचे आ गई हैं, जो इस सीज़न में 2585 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। कुदरती वजहों से कुछ लोकल फसल के नुकसान के बावजूद, मौजूदा रबी सीज़न में देश में गेहूं का बंपर प्रोडक्शन होने की उम्मीद है। इस बीच, सरकार ने सिर्फ़ 30.3 मिलियन टन खरीद का टारगेट रखा है।

पंजाब, हरियाणा और बिहार में गेहूं की सरकारी खरीद 1 अप्रैल से शुरू होने वाली है। साथ ही, इंडस्ट्री और ट्रेड सेक्टर भी गेहूं खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि कीमतें काफी कम हो गई हैं।