नई दिल्ली। आरजेडी के राज्यसभा सांसद संजय यादव ने शुक्रवार को राज्यसभा के शून्यकाल में आपदा और संकट के समय एयरलाइंस, एंबुलेंस और ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं में लागू डायनामिक प्राइसिंग पर रोक लगाने की मांग उठाई।
उन्होंने कहा कि जब देश किसी आतंकी हमले, प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना से जूझ रहा होता है तब नागरिक पहले ही भय और असुरक्षा के माहौल में होते हैं लेकिन उसी समय कुछ कंपनियां मुनाफाखोरी का अवसर तलाशने लगती हैं।
यादव ने हालिया पहलगाम आतंकी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि श्रीनगर से दिल्ली की फ्लाइट का किराया सामान्य 6-8 हजार रुपये से बढ़कर 65 हजार रुपये तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि क्या यह मानवता का व्यापार नहीं है? उन्होंने कहा कि यह समस्या एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि हर संकट के समय ऐसा पैटर्न देखने को मिलता है जितना अधिक डर, उतना अधिक दोहन। बाढ़ या अन्य आपदाओं के दौरान जरूरी सामानों की कीमतें बढ़ना, कैब और एंबुलेंस का किराया कई गुना होना, सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करता है।
आरजेडी सांसद ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों में नियंत्रण का अभाव सरकार की नाकामी को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि संकट के समय कालाबाजारी, जमाखोरी और मुनाफाखोरी बढ़ जाती है, जिससे आम जनता की मुश्किलें और बढ़ती हैं।
यादव ने मांग की कि देश में क्राइसिस फेयर कैप कानून लाया जाए, जिससे आपदा के समय टिकट, होटल, दवाइयों और परिवहन सेवाओं की अधिकतम कीमत तय हो। साथ ही, जैसे ही किसी क्षेत्र में आपदा घोषित हो, एयरलाइंस के एल्गोरिदम को फ्रीज कर ऑटोमैटिक फेयर फ्रीज लागू किया जाए।
डायनामिक प्राइसिंग को रोकना चाहिए
उन्होंने कहा कि संकट के दौरान डायनामिक प्राइसिंग को अस्थायी रूप से रोकना चाहिए और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई, भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसे कदम उठाए जाएं। इसके अलावा राष्ट्रीय आपदा यात्रा प्रोटोकॉल बनाने की भी मांग की ताकि आपात स्थिति में लोगों को सस्ती और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित हो सके। संजय यादव ने कहा कि भारत एक संवेदनशील लोकतंत्र है, आपदा के समय सेवा होनी चाहिए, सौदा नहीं।

