संयुक्त राष्ट्र महासभा में ट्रंप ने किसे दी भारी टैरिफ लगाने की धमकी, जानिए

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वाशिंगटन। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर रूस यूक्रेन में चल रहे युद्ध को समाप्त करने से इनकार करता है, तो अमेरिका उसके ऊपर भारी टैरिफ लगाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन में रूस का यह युद्ध रूस की छवि को बिल्कुल अच्छा नहीं दिखा रहा है। यदि रूस समझौते के लिए तैयार नहीं होता, तो हम भारी टैरिफ लगाने को तैयार हैं। अपने संबोधन में ट्रंप ने यूक्रेन संघर्ष का बार-बार जिक्र किया और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपने पुराने संबंधों पर भी विचार व्यक्त किए।

उन्होंने बताया कि शुरू में उन्हें लगा था कि युद्ध को समाप्त करना आसान होगा, क्योंकि पुतिन के साथ उनके रिश्ते हमेशा अच्छे रहे हैं। लेकिन अब उन्होंने मॉस्को के यूक्रेन अभियान की कड़ी आलोचना की, यह कहते हुए कि यह युद्ध रूस को नकारात्मक रूप से पेश कर रहा है।

बता दें कि ट्रंप का पुतिन और यूक्रेन युद्ध पर रुख में बड़ा बदलाव आया है। शुरुआती दिनों में उन्होंने पुतिन की ‘बड़े नेता’ और ‘प्रतिभाशाली व्यक्ति’ के रूप में प्रशंसा की थी। यहां तक कि पदभार संभालने के 24 घंटों के अंदर ही यूक्रेन संघर्ष समाप्त करने का वादा किया था। लेकिन जैसे-जैसे युद्ध लंबा खिंचता गया, ट्रंप का लहजा सख्त हो गया।

उन्होंने सार्वजनिक रूप से पुतिन की निंदा की, उन्हें ‘पागल’ तक कहा। युद्ध से निपटने के उनके तरीके पर असंतोष जताया। ट्रंप ने पुतिन को अल्टीमेटम देते हुए युद्ध को निश्चित समयसीमा में खत्म करने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने प्रतिबंधों की धमकी दी और यूक्रेन को सैन्य सहायता बढ़ाने की बात कही।

मंगलवार को यूएनजीए में अपने संबोधन में ट्रंप ने चीन और भारत को निशाना बनाया, दावा करते हुए कि ये देश रूसी तेल खरीदकर यूक्रेन में रूसी युद्ध के ‘प्राथमिक वित्तपोषक’ हैं। ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल खरीद के लिए भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया है, जिससे अमेरिका द्वारा भारत पर कुल शुल्क 50 प्रतिशत हो गया।

यह दुनिया में सबसे अधिक दर है। इस दौरान ट्रंप ने कहा कि यह अक्षम्य है कि नाटो देशों ने भी रूसी ऊर्जा और उसके उत्पादों की खरीद की है। इससे पहले, संयुक्त राष्ट्र में ट्रंप ने अपना पुराना दावा दोहराया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रुकवाया था।

उन्होंने कहा कि इसी तरह, केवल सात महीनों में मैंने सात ऐसे युद्ध समाप्त करवाए हैं… कुछ तो 31 साल से चल रहे थे। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने कंबोडिया-थाईलैंड, कोसोवो-सर्बिया, कांगो-रवांडा, पाकिस्तान-भारत, इजराइल-ईरान, मिस्र-इथियोपिया तथा आर्मेनिया-अजरबैजान जैसे युद्धों को समाप्त करवाया, जिनमें अनगिनत लोग मारे गए थे।

चीन, भारत और नाटो की आलोचना
यूएनजीए में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन में रूस का युद्ध रूस की अंतरराष्ट्रीय छवि को धूमिल कर रहा है। उन्होंने रूसी तेल खरीदकर इस संघर्ष को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए चीन और भारत की निंदा की। साथ ही, रूस की प्रमुख ऊर्जा आपूर्ति में कटौती न करने के लिए नाटो सदस्य देशों को जिम्मेदार ठहराया।

फिलिस्तीनी राज्य को किया खारिज
संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए ट्रंप ने फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने के विचार को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देना हमास के लिए बहुत बड़ी जीत होगी। उनका तर्क था कि शांति चाहने वाले लोगों को सबसे पहले सभी बंधकों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए एकजुट होना चाहिए। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि गाजा का युद्ध तत्काल समाप्त हो जाना चाहिए और सभी 20 बंधकों को बिना किसी विलंब के मुक्त किया जाए।