श्रीनाथ जी का पाटोत्सव मनाया, भक्तों संग खेली रंग से होली
कोटा। शुद्धाद्वैत प्रथम पीठ श्री बड़े मथुराधीश मंदिर पर रविवार को श्रीनाथजी का पाटोत्सव मनाया गया। इस दौरान 40 दिवसीय होली महोत्सव के तहत् प्रथम पीठ युवराज मिलन कुमार गोस्वामी ने ठाकुर श्री मथुराधीश प्रभु को रंग और गुलाल सेवित किए। पिचकारी से प्रभु और भक्तों को रंग चढ़ाकर गीली होली की शुरुआत की। वहीं महाराज इज्येराज सिंह को बीड़ा भेंट किया गया। उत्सव में धमार रसिया गायन किया गया।
पाटोत्सव के अवसर पर मथुराधीश मंदिर में पुष्टिमार्गीय परंपरा के साथ होली महोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर भक्तों के साथ पूरा मंदिर परिसर श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के रंगों से सराबोर नजर आया। प्रभु के जयकारों से हवेली गूंज उठी। मंगला दर्शन के पश्चात श्रीनाथजी को पुष्टिमार्गीय परंपरा अनुसार अबीर-गुलाल अर्पित किया गया। मंदिर में सजीव कीर्तन, हवेली संगीत और पद गायन के माध्यम से रसिया गायन किया गया। भक्तों ने “होरी खेलत नंदलाल..” के जयघोष के साथ उत्सव में सहभागिता निभाई।
पाटोत्सव के अवसर पर प्रभु को विशेष श्रृंगार, पुष्प अलंकरण एवं ऋतु अनुरूप वस्त्र धारण कराए गए। सेवायतों द्वारा परंपरागत विधि से होली खेली गई। श्रद्धालुओं ने प्रभु के चरणों में अबीर अर्पित कर सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।
बसंत पंचमी से होली तक चलता है महोत्सव
पुष्टिमार्ग के मंदिरों में होली का पर्व 40 दिन का होता है। क्योंकि सबजग होरी या ब्रज होरा अर्थात ब्रज मंडल में 40 दिन की होली होती है। जिसे होरा कहते हैं। युवराज मिलन बावा ने बताया कि पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के मंदिरों में बसंत पंचमी के दिन से ठाकुरजी को अबीर गुलाल धराया जाता है। 40 दिवसीय होली महोत्सव के तहत प्रथम 10 दिन अबीर और गुलाल से होली खेली जाती है। इसके बाद चंदन से, फिर हरी गुलाल, पीली गुलाल से होली खेली जाती है। होली उत्सव का क्रम दिनों के अनुपात में बढ़ता जाता है।
गरम वस्तुओं का भोग हुआ बंद
प्रथम पीठ युवराज मिलन कुमार गोस्वामी ने बताया कि ठाकुर जी को विशेष भोग धराया गया। जिसमें शक्कर पाडा, मोहन थाल, मोती चूर के लड्डू, बासुन्दी, श्रीखंड आरोगाए। बसंत पंचमी से ठाकुर जी को गरम वस्तुओं का भोग आना भी बंद हो गया है। उन्होंने बताया कि मंदिर में आम के पत्तों की बंदनवार सजाई गई।

