विषयों की चाह एक अग्नि है जो मानसिक पीड़ा उत्पन्न करती है: विभाश्री माताजी

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आचार्य विनिश्चय सागर जी का कुन्हाड़ी में भव्य मंगल प्रवेश 25 नवंबर को

कोटा। आचार्य विनिश्चय सागर महाराज ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश 25 नवंबर, ऋद्धि सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी में होगा। तलवंडी मंदिर से विहार करके आने वाले आचार्य श्री की रजत सिटी, महाराणा प्रताप सर्किल पर गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ससंघ द्वारा मंगल आगवानी की जाएगी।

रिद्धि-सिद्धि मंदिर के अध्यक्ष राजेंद्र गोधा ने बताया कि णमो लोए सव्व साहूणं के मंगल उद्घोष के साथ ऋद्धि सिद्धि गुरू सेवक संघ एवं समस्त दिगमबर जैन समाज गुरूदेव की अगुवानी करेगा।

गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने रविवार को प्रवचन में मनुष्य की आवश्यकता बहुत कम होती है, परंतु उसकी इच्छा असीमित है। पहले सुविधाएं कम थीं पर सुख था। आज बंगला बन जाए, परंतु पड़ोसी का बड़ा बंगला देखकर मनुष्य दुखी हो जाता है। मनुष्य की चाह बढ़ती जा रही है और दिखावा अधिक हो गया है, जबकि आवश्यकता बहुत कम है।

गणिनी माताजी ने स्पष्ट किया कि विषयों की चाह एक प्रकार की अग्नि है, जो दूसरों को नहीं दिखती और मानसिक पीड़ा उत्पन्न करती है। उन्होंने समझाया कि सम्यक दृष्टि वाला जीव संसार में रहते हुए भी आत्मकल्याण का मार्ग खोज लेता है, जबकि मोह, माया और इच्छाओं में उलझा व्यक्ति जन्म-मरण के चक्र में फंसा रहता है।

गुरुमाता ने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि भगवान से मनोकामनाएं नहीं मांगनी चाहिए। बल्कि स्वयं भगवान बनने का प्रयास करना चाहिए। यही सच्चा धर्म है। उन्होंने समाज से आग्रह किया कि आध्यात्मिक दृष्टि, सद्विचार, परोपकार और पारिवारिक एकजुटता को पुनः जीवन में स्थापित करें, तभी समाज का उत्थान संभव है।

आचार्य श्री के आगमन की तैयारियां पूर्ण
मंत्री पंकज खटोड, ने बताया कि 25 नवंबर को आचार्य विनिश्चय सागर महाराज के मंगल प्रवेश के लिए संपूर्ण तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। रजत सिटी, महाराणा प्रताप सर्किल पर भव्य आगवानी का आयोजन किया गया है, जहां गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ससंघ आचार्य श्री का स्वागत करेंगी।