कोटा का नाम एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज
कोटा। 132वें राष्ट्रीय मेला दशहरा- 2025 के तहत रावण के कुनबे का बुद्धवार शाम को परंपरागत तरीके से दहन हुआ। भगवान लक्ष्मीनारायणजी की सवारी के साथ लाव लश्कर सहित पहुंचे कोटा रियासत के पूर्व महाराव इज्यराज सिंह ने पूजा-अर्चना के बाद रावण की नाभि के कलश को तीर से भेदा। इसके बाद अहंकारी रावण के कुनबे के साथ बुराई के अन्त होने का सिलसिला शुरु हुआ।
लाखों लोगो को उस समय निराशा हाथ लगी जब 44 लाख रुपये लागत से तैयार रावण का पुतला थोड़ी सी आतिशबाजी के बाद अधजला ही रह गया। भले ही विश्व के सबसे ऊंचे रावण के का पुतला होने का विश्व रिकॉर्ड बना हो। किन्तु रावण के पुतले का नहीं जलना शहर में चर्चा का विषय जरूर बन गया।
गढ़ पैलेस में दरीखाने के बाद भगवान लक्ष्मीनारायण जी की सवारी दशहरा मैदान पहुंची। वहां पूर्व महाराव इज्येराज सिंह ने सीता माता के पाने और ज्वारे की पूजा की। रावण के अमृत कलश पर तीर चलाया। पूर्व महाराज इज्यराज सिंह के अमृत कलश फोड़ने के साथ ही 8:34 बजे रावण के कुनबे का दहन शुरू हुआ।
उसके बाद एक-एक करके पुतलों का दहन किया गया। पुतलों में आग लगते ही दहन स्थल पर मौजूद हर शख्स के हाथ में मोबाइल कैमरे जगमगा उठे। सबसे पहले कुंभकर्ण के पुतले को आग लगाई गई।
उसके बाद मेघनाद के पुतले को आग लगाई। अंत में 8:38 पर रावण का पुतले का दहन शुरु हुआ। इस बार ग्रीन आतिशबाजी के रंगीन नजारों के साथ अहंकारी रावण का कुनबे सहित दहन हुआ। सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त रहे।
इस दौरान सबसे पहले रावण के छतरी में ब्लास्ट हुआ तो लोगों ने जय श्रीराम के नारों से प्रांगण को गूंजा दिया। इसके बाद मुकुट, टोपी, नक्काशी में भी बलास्ट होते गए। जिस पर हर कोई रोमांचित महसूस कर रहा था। साइड के चेहरों में भी कभी ऊपर तो कभी नीचे से चिंगारी निकलती रही।
इस दौरान मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला थे। वहीं शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, विधायक संदीप शर्मा, कल्पना देवी, महापौर राजीव भारती, मेला समिति अध्यक्ष विवेक राजवंशी, भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश जैन, प्रेम गौचर, रामेश्वर मीणा, पूर्व विधायक चंद्रकांता मेघवाल भी मौजूद रहे।
कोटा का नाम एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के प्रतिनिधि भुवनेश मथुरिया ने सीएम भजनलाल को विश्व कीर्तिमान में दर्ज किए जाने संबंधी सार्टिफिकेट सौंपा।

इस दौरान सीएम भजनलाल ने उपलब्धि को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की सोच बताया। उन्होंने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए मेला समिति अध्यक्ष विवेक राजवंशी का अभिनंदन किया। इस ऐतिहासिक गर्व के पलों के हजारों लोग साक्षी बने।
मेला दशहरा में अब तक 72 से 75 फीट के रावण के पुतले बनते आए हैं। परन्तु लोकसभा स्पीकर बिरला की मंशा के अनुरुप इस बार 215 फीट का रावण का पुतला बनाया गया था।उल्लेखनीय है कि अभी दिल्ली के नाम 210 फीट का रावण का पुतला बनाने का रिकॉर्ड दर्ज था। जिसे अब कोटा ने अपने नाम कर लिया है।
भुवनेश मथुरिया ने कहा कि एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड गत 19 वर्ष से रिकार्ड दर्ज करने का काम कर रही है। जिसका मुख्यालय वियतनाम में है। यह भारत सरकार से पंजीकृत हैं। अब तक इण्डिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में 40 हजार प्रविष्टियां दर्ज हैं।
रावण ने जलने से मना कर दिया।
राजस्थान में सर्वाधिक मशहूर कोटा का दशहरा है। यहां इस बार दुनिया का सबसे ऊंचा 233 फीट का रावण पुतला बनाया। इस पुतले की इतनी ख्याति कि रावण दहन देखने लाखों लोग पहुँच गए। दहन का वक्त आया तो रावण ने जलने से मना कर दिया। लाख कोशिशों के बावजूद जब पुतला जला नहीं तो फायर ब्रिगेड के मदद से कुंभकर्ण, मेघनाद सहित रावण परिवार के पुतलों पर डीजल छिड़क, आग लगाई। इसके बाद भी पुतले पूरी तरह नहीं जले। इन तीनों पुतलों में से महज मेघनाद के पुतले का मुंह जल पाया बाकी यूं ही खड़े रहे।
पहली बार परंपरा से खिलवाड़: पार्षद सलीना शेरी
नगर निगम दक्षिण की पार्षद सलीना शेरी ने कहा कि कोटा का ऐतिहासिक दशहरा महोत्सव इस बार अपनी परंपराओं से भटक गया। इस आयोजन पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा नेताओं की चाटुकारिता और दिखावे की राजनीति ने दशहरा जैसे पावन पर्व की गरिमा को ठेस पहुँचाई।
उन्होंने कहा कि इस बार 233 फीट ऊँचा रावण का पुतला तो खड़ा किया गया, लेकिन उसे परंपरा के अनुसार जलाया नहीं गया। सिर्फ आतिशबाज़ी कर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश की गई। इससे करोड़ों रुपए जनता के पैसों की बर्बादी हुई। सलीना शेरी ने आरोप लगाया कि चार दिन पहले रावण को खड़ा कर गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन अंत में सारे दावे धरे के धरे रह गए।

