कोटा/ सांगोद। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर रविवार को सांगोद विधानसभा क्षैत्र के दौरे पर रहे। उन्होंने आज सांगोद उपखंड के विनोद कलां में बन रहे डायवर्जन चैनल का निरीक्षण किया।
कार्य की प्रगति को लेकर सिंचाई विभाग और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा की। उन्होंने डायवर्जन चैनल के गुणवत्तापूर्ण निर्माण और समयबद्ध कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए।
मंत्री नागर ने बताया कि निर्माण कार्य ठीक चल रहा है और इसे समय पर पूरा करने के लिए कहा है। यह कार्य पिछले बजट में स्वीकृत हुआ था। इस बार के बजट से पहले ही कार्य प्रारंभ हो गया है। मंत्री नागर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बरसात से पहले ही डायवर्जन चैनल बनकर तैयार हो जाए।
इसके निर्माण के बाद किसानों के खेतों में जल भराव की समस्या समाप्त होगी। जिससे फसलों को नुकसान से बचाया जा सकेगा। वहीं आसपास कुराडिया खुर्द, विनोद कलां, श्यामपुरा आदि पंचायत के गांवों को बाढ़ के पानी से मुक्ति मिल सकेगी।
उन्होंने डायवर्जन चैनल के निर्माण की खुदाई में निकल रही मिट्टी को विभिन्न निचले स्थानों पर भरने के निर्देश दिए हैं। मंत्री नागर ने कहा कि इस मिट्टी को स्कूलों, सामुदायिक भवन और शमशान आदि के निचले और जलभराव वाले स्थानों में भरा जाए। जिससे वहां की भी समस्या का समाधान हो सकेगा।
14 गांव जुड़ेंगे पवन परियोजना से
ऊर्जा मंत्री नागर ने कहा कि परवन प्रोजेक्ट के एलएमसी के अधिकारियों से चर्चा हुई है। पूर्व कांग्रेस सरकार ने कुंदनपुर, मंडीता, मंडाप को प्रोजेक्ट में शामिल नहीं किया था। अब इसको लेकर सीएम से अनुरोध किया गया है। इसके बाद चंबल से 2500 हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने के लिए नया प्रस्ताव बनाया जाएगा। जिसमें छोड़े गए सभी 14 गांवों को जोड़ा जाएगा। इसके लिए लगभग 50 करोड रुपए की स्वीकृति जारी होगी।
छह गांव की डेढ़ सौ हेक्टर कृषि भूमि होती है प्रभावित
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने बताया कि विनोद खुर्द में डायवर्जन चैनल बनाए जाने के लिए 27 जून 2025 को 13.82 करोड रुपए की स्वीकृति जारी हुई थी। यहां आस-पास के 6 गांवों की लगभग 150 हेक्टेयर कृषि भूमि बाढ़ से प्रभावित होती है। दो-तीन महीने तक बाढ़ का पानी भरा रहने से कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहा है। जल निकास अवरुद्ध होने और हरिश्चंद्र सागर परियोजना प्रणाली का अंतिम छोर होने के कारण समस्या गंभीर हो रही थी। उन्होंने बताया कि कुराड़िया खुर्द, विनोद कलां, दांढीया, नांगलहेड़ी, कोलाना, रामपुरा की झोपड़ियां के लगभग 8- 10 हजार लोग प्रभावित होते हैं।

