कोटा। तपोभूमि प्रणेता, पर्यावरण संरक्षक एवं सुविख्यात जैनाचार्य प्रज्ञासागर मुनिराज का चातुर्मास मंगलवार को भी जारी रहा । प्रज्ञासागर महाराज ने अपने प्रवचनों में श्रावकों को संबोधित करते हुए वास्तु विज्ञान के गूढ़ सिद्धांतों एवं व्यावहारिक उपायों की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भूमि चयन एवं गृह निर्माण में वास्तु सिद्धांतों का पालन करना सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक शांति के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि समचौरस (स्क्वायर) भूखंड को वास्तु की दृष्टि से सर्वोत्तम माना गया है। आड़ी-टेढ़ी अथवा अनियमित आकार की भूमि मानसिक और पारिवारिक अस्थिरता का कारण बन सकती है। उन्होंने वास्तु से जुड़ी आम भ्रांतियों को भी स्पष्ट किया और कहा कि केवल दिशा नहीं, अपवित्र ऊर्जा और घटनाओं का इतिहास भी भूमि पर प्रभाव डालता है।
उन्होंने श्रावकों को चेताते हुए कहा कि ऐसे मकानों का लेन-देन नहीं करना चाहिए जहाँ विधवा, परित्यक्ता या नपुंसक व्यक्ति दीर्घकाल तक निवास कर चुके हों। ऐसी ऊर्जा से घर की सकारात्मकता प्रभावित होती है और पारिवारिक सौहार्द में बाधा आती है।
मंदिर की छाया और भवनों की स्थिति
वास्तु दर्शन के अनुसार मंदिर की छाया और उसके आस-पास बने मकानों की स्थिति भी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। गुरुदेव ने स्पष्ट किया कि यदि मंदिर और मकान के मध्य सार्वजनिक मार्ग हो तो छाया दोष नहीं लगता। परंतु जैन मंदिर के पीछे मकान, शिव मंदिर के ठीक सामने, राम कृष्ण मंदिर के दाएँ-बाएँ, देवी मंदिर के चारों ओर बने मकान में वास्तु की दृष्टि से अनुचित और दोषपूर्ण है। उन्होंने भूमि परीक्षण की एक विशेष विधि बताते हुए कहा कि यदि किसी जमीन पर मौर (मोर) आकर भूमि को कुरेदता है, तो वह भूमि आध्यात्मिक और ऊर्जा की दृष्टि से श्रेष्ठ मानी जाती है।
कर्नाटक क्षेत्र के बारे में चर्चा करते हुए पूज्य गुरुदेव ने कहा कि यह क्षेत्र मुनियों के वर्षावास हेतु आदर्श है। वहाँ सूर्य की किरणें तीव्र होती हैं परंतु वातावरण शीतल रहता है। उन्होंने बताया कि वहाँ मृत्यु उपरांत शव का रात में भी संस्कार कर दिया जाता है, जिससे शव में सूक्ष्म जीवों की उत्पत्ति को रोका जा सके। यह अहिंसा के मूल सिद्धांतों के अनुरूप है।
भगवान पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक महोत्सव 31 जुलाई को
प्रज्ञा लोक परिसर में 31 जुलाई को जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। आयोजन के संयोजक एवं चेयरमैन यतिश जैन खेड़ावाला ने बताया कि प्रातः 7:00 बजे भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ प्रज्ञालोक परिसर से होगा। इस शोभायात्रा में 24 तीर्थंकर भगवानों की रथ एवं पालकियों में दिव्य झांकी निकाली जाएगी, जिनकी अगुवाई सौधर्म इंद्र और इंद्राणी करेंगे। आयोजन में भगवान को 24 किलोग्राम का महालड्डू अर्पित किया जाएगा।

