वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक के साथ मनाया उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म

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जहां आत्मबल है, वहां शांति है और वही ब्रह्मचर्य का सार है: रेशु दीदी

कोटा। कुन्हाड़ी के बालिता रोड स्थितश्री पद्मप्रभु अग्रवाल दिगंबर जैन मंदिर में शनिवार को अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर दशलक्षण धर्म पर्व का समापन बड़े श्रद्धा-भाव से किया गया। शनिवार को वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक के साथ-साथ उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म मनाया।

बाल ब्रह्मचारिणी रेशु दीदी के प्रवचनों ने श्रोताओं को आत्म-मंथन और संयम की ओर उन्मुख किया।रेशु दीदी ने प्रवचन करते हुए कहा कि आज का इंसान भौतिक सुख-सुविधाओं की अंधी दौड़ में ऐसा उलझ गया है कि वह आत्म-शांति और संतुलन से दूर होता जा रहा है। काम, क्रोध, मोह, माया और लोभ जैसे विकारों ने जीवन को अशांत और दिशाहीन बना दिया है।

उन्होंने कहा कि उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म केवल इंद्रियों के संयम का नाम नहीं, बल्कि विचारों, व्यवहार और दृष्टिकोण की पवित्रता भी है। यह वह स्थिति है जब व्यक्ति आत्मानुशासन में रहते हुए ध्यान, स्वाध्याय और साधना के द्वारा अपने चित्त को स्थिर करता है।”जहाँ इंद्रियों पर नियंत्रण है, वहाँ आत्मबल है। जहाँ आत्मबल है, वहाँ शांति है और वही ब्रह्मचर्य का सार है।

प्रातःकालीन बेला में मंदिर में शांतिधारा और वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष्य में श्रद्धालुओं द्वारा निर्वाण लड्डू चढ़ाए और विशेष पूजन किया । दोपहर को भव्य श्रीजी की शोभायात्रा में जैन धर्म की परंपरा और गौरव का सुंदर संगम देखने को मिला। जैन ध्वज के साथ, गाजे-बाजे, भजनों की मधुर ध्वनि पर थिरकते हुए महिलाएं पुरुष एवं बच्चे चल रहे थे।

शोभायात्रा के उपरांत श्रीजी का अभिषेक कर माला बोली की गई। समस्त आयोजन में मंदिर कमेटी के अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन, बाबूलाल जैन, सीए पारस जैन, शंभू जैन, अतुल जैन, राजेश जैन, विजय जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। हर संध्या को मंदिर में महाआरती के बाद रेशु दीदी के सहज एवं प्रभावशाली प्रवचन हो रहे हैं। इनके साथ एक प्रश्न मंच भी आयोजित किया जाता है, जिसमें श्रद्धालु जिज्ञासाओं का समाधान पाते हैं।