स्पीकर बिरला की तारीफ विपक्ष को नहीं पच रही, जानिए क्या बोला पीएम मोदी ने

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कोटा। लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर 9 मार्च को होने वाली बहस से ठीक दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोटा के मंच से ऐसा बयान दिया, जिसने राष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के शिलान्यास समारोह को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की कार्यशैली की खुलकर प्रशंसा की और उन्हें एक ऐसे शिक्षक के रूप में बताया जो अनुशासनहीन छात्रों के बीच भी पूरी कक्षा को संभाल लेते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान केवल प्रशंसा भर नहीं, बल्कि संसद में होने वाली बहस से पहले दिया गया एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि ओम बिरला का व्यक्तित्व और उनका कामकाज संसदीय लोकतंत्र की गरिमा को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि बिरला ऐसे शिक्षक की तरह हैं जो कक्षा में मौजूद हर छात्र को साथ लेकर चलते हैं, चाहे कुछ छात्र अनुशासनहीन क्यों न हों।

पीएम ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के रूप में बिरला ने हमेशा पक्ष और प्रतिपक्ष से ऊपर उठकर काम किया है और संविधान की मर्यादाओं को सर्वोपरि रखा है। उन्होंने यह भी कहा कि बिरला सभी सांसदों का सम्मान करते हैं और सदन में कई बार उठने वाली तीखी टिप्पणियों और कड़वे शब्दों को भी धैर्य और मुस्कान के साथ स्वीकार करते हैं।

उत्पाती छात्रों की टिप्पणी से विपक्ष पर तंज
प्रधानमंत्री की टिप्पणी में एक राजनीतिक संकेत भी छिपा हुआ माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि कभी-कभी कुछ घरानों के अहंकारी और उत्पाती छात्र भी कक्षा में आ जाते हैं, लेकिन तब भी बिरला सदन के मुखिया के रूप में सभी को संभाल लेते हैं और किसी को अपमानित नहीं करते। संसद के हालिया घटनाक्रम को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में इस बयान को विपक्ष के आक्रामक रवैये पर बिना नाम लिए किया गया तंज माना जा रहा है। माना जा रहा है कि पीएम ने इस टिप्पणी के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि सदन में अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी स्पीकर निभा रहे हैं और सरकार उनके साथ खड़ी है।

अविश्वास प्रस्ताव से पहले ‘सपोर्ट सिग्नल’
दरअसल, संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले ही दिन विपक्ष द्वारा लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा प्रस्तावित है। ऐसे में बहस से पहले प्रधानमंत्री का सार्वजनिक मंच से स्पीकर की प्रशंसा करना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि इससे एनडीए खेमे के भीतर भी एक स्पष्ट संदेश गया है कि सरकार स्पीकर के समर्थन में मजबूती से खड़ी है। इस बयान को कई लोग ‘बिरला कवच’ के रूप में देख रहे हैं, जो बहस से पहले राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकता है।

हाड़ौती के विकास में बिरला की भूमिका का जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कोटा और हाड़ौती क्षेत्र के विकास में ओम बिरला की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शिक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बिरला लगातार प्रयास करते रहे हैं। पीएम ने ट्रिपल आईटी के नए कैंपस, सड़क परियोजनाओं और अन्य विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि बिरला की प्राथमिकता हमेशा यह रही है कि कोटा और आसपास के क्षेत्रों में युवाओं को बेहतर अवसर मिलें और लोगों का जीवन स्तर सुधरे।

कोटा-बूंदी एयरपोर्ट को बताया विकास का नया अध्याय
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने करीब 1500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को हाड़ौती क्षेत्र की प्रगति का नया अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि अब तक कोटा और आसपास के लोगों को हवाई यात्रा के लिए जयपुर या अन्य शहरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन एयरपोर्ट बनने के बाद क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इससे व्यापार, उद्योग और पर्यटन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

विकास मंच से दिया संसदीय राजनीति का संदेश
राजनीतिक नजरिए से देखें तो कोटा के विकास कार्यक्रम के मंच से दिया गया प्रधानमंत्री का यह बयान महज औपचारिक प्रशंसा नहीं माना जा रहा। संसद में प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव की बहस से ठीक पहले आया यह बयान इस बात का संकेत देता है कि स्पीकर को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार उनका खुलकर समर्थन करती दिखाई देगी। ऐसे में कोटा से आया यह संदेश अब संसद की आगामी बहस में भी चर्चा का विषय बन सकता है।