लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस शुरू

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नई दिल्ली। No confidence motion:  संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण का आज दूसरा दिन है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस अब शुरू हो गई है। पीठासीन अध्यक्ष ने चर्चा के लिए 10 घंटे का समय दिया है।

लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया। इस प्रस्ताव पर करीब 10 घंटे की बहस होगी। यह प्रस्ताव मुख्य रूप से कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों (INDIA गठबंधन) की ओर से लाया गया है।

इसमें ओम बिरला पर पक्षपातपूर्ण आचरण करने, विपक्षी सांसदों को बोलने से रोकने और सदन की कार्यवाही में निष्पक्षता न बरतने का आरोप लगाया गया है। प्रस्ताव को पेश करने वाले प्रमुख सांसदों में कांग्रेस के मोहम्मद जावेद, कोडिकुनिल सुरेश और मल्लू रवि शामिल हैं। विपक्ष ने फरवरी 2026 में ही इस प्रस्ताव का नोटिस दिया था, जिसमें लगभग 118 सांसदों के हस्ताक्षर थे।

लोकसभा में डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार ने पिछले कई वर्षों से डिप्टी स्पीकर का पद खाली रखा है, जिससे एक तरह का संवैधानिक खालीपन पैदा हो गया है।

उन्होंने कहा कि सदन को ऐसे सदस्य का चुनाव करना चाहिए जो अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली बहस के दौरान कार्यवाही की अध्यक्षता कर सके। वहीं भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष की आपत्तियां पूरी तरह निराधार हैं और संसद की कार्यवाही तय नियमों के अनुसार चल रही है।

पीठासीन अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा कि स्पीकर का पद खाली नहीं है, इसलिए उन्हें कार्यवाही चलाने का अधिकार है। कई सदस्यों ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें बाद में मौका दिया जाएगा।

लोकसभा में उपसभापति की अनुपस्थिति और सदन की कार्यप्रणाली पर कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने गंभीर आरोप लगाए। स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि विपक्षी गठबंधन INDIA के लगभग 200 सांसद होने के बावजूद लोकसभा में अभी तक डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति नहीं की गई है।

देश को यह जानना चाहिए कि सदन का संचालन कैसे हो रहा है। गोगोई ने आगे कहा कि सदन में माइक्रोफोन को हथियार बनाया जा रहा है। ट्रेजरी बेंच (सत्तापक्ष) के सदस्यों को बोलने का मौका दिया जाता है, लेकिन विपक्ष के सदस्यों, खासकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने के लिए माइक्रोफोन नहीं दिया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि 20 बार नेता विपक्ष को नहीं बोलने दिया गया। चेयर पर बैठे जगदंबिका पाल ने इन आरोपों को सिर्फ बदनामी करार दिया, लेकिन गौरव गोगोई ने इसका खंडन करते हुए कहा कि ये महज आरोप नहीं हैं, बल्कि यही वह प्रस्ताव है जिस पर चर्चा हो रही है।

जगदंबिका पाल की अध्यक्षता पर सरकार का समर्थन
लोकसभा में स्पीकर को पद से हटाने के प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा के दौरान जगदंबिका पाल की अध्यक्षता को सरकार का समर्थन मिला है। केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव पेश किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में चेयरपर्सन के पैनल का कोई सदस्य सदन की अध्यक्षता कर सकता है और इसी आधार पर जगदंबिका पाल कार्यवाही चला रहे हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह बहस संविधान के अनुच्छेद 94 के तहत हो रही है, जिसमें लोकसभा स्पीकर को पद से हटाने का प्रस्ताव रखा गया है। नियमों के अनुसार, जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव चर्चा में होता है, तो स्पीकर स्वयं सदन की अध्यक्षता नहीं करते। ऐसे में डिप्टी स्पीकर या पैनल का कोई अन्य सदस्य कार्यवाही संचालित करता है।