नई दिल्ली। देश के रियल एस्टेट क्षेत्र को विनियमित करने के लिए बनाए गए रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी RERA को लेकर सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों ने पूरे सेक्टर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
अदालत ने विभिन्न राज्यों में RERA के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि कई जगहों पर यह संस्था डिफॉल्टर बिल्डरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय उन्हें राहत देने जैसी भूमिका निभाती दिख रही है। यहां तक कि अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि अगर व्यवस्था प्रभावी नहीं है तो ऐसी संस्था के अस्तित्व पर ही पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
कानूनी विशेषज्ञों और रियल एस्टेट विश्लेषकों का मानना है कि शीर्ष अदालत की यह टिप्पणी केवल नाराजगी भर नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि अब जोर कानून की मजबूती पर नहीं, बल्कि उसके सख्त और ईमानदार क्रियान्वयन पर रहेगा। यदि राज्यों के RERA प्राधिकरण अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन नहीं करते हैं तो उनके कामकाज की समीक्षा और जवाबदेही तय होना तय माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अदालत की टिप्पणी के बाद प्राधिकरणों पर यह दबाव बढ़ेगा कि वे परियोजनाओं की समयसीमा की निगरानी गंभीरता से करें, एस्क्रो खातों के उपयोग की पारदर्शिता सुनिश्चित करें और लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करें।
कई राज्यों में खरीदारों की शिकायतें वर्षों तक लंबित रहती हैं, जिससे घर खरीदारों का भरोसा कमजोर होता है। अब संभावना है कि शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाया जाएगा।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यदि RERA का प्रवर्तन सख्त होता है तो इसका सीधा असर उन डेवलपर्स पर पड़ेगा जो परियोजनाओं को समय पर पूरा नहीं करते या वित्तीय नियमों का पालन नहीं करते।
ऐसे छोटे या कमजोर डेवलपर्स के लिए बाजार में टिके रहना कठिन हो सकता है। दूसरी ओर, मजबूत वित्तीय स्थिति और बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस वाले बड़े डेवलपर्स को इससे लाभ मिल सकता है, क्योंकि निवेशकों और खरीदारों का भरोसा संगठित और जिम्मेदार कंपनियों की ओर बढ़ेगा।
रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी Anarock के चेयरमैन अनुज पुरी का भी मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी राज्यों में नियमों के कड़ाई से पालन की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है। इससे परियोजनाओं की निगरानी मजबूत होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही डेवलपर्स पर समय पर प्रोजेक्ट पूरा करने का दबाव भी बढ़ेगा।
घर खरीदने वाले लोगों के लिए यह घटनाक्रम सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यदि RERA संस्थाएं सक्रिय और जवाबदेह बनती हैं तो खरीदारों की शिकायतों का समाधान जल्दी होगा और उन्हें कानूनी सुरक्षा का वास्तविक लाभ मिलेगा। इससे रियल एस्टेट सेक्टर में विश्वास बहाली की प्रक्रिया को बल मिल सकता है।
कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। उसका प्रभावी और निष्पक्ष क्रियान्वयन ही वास्तविक बदलाव ला सकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य स्तरीय RERA प्राधिकरण इस संदेश को किस गंभीरता से लेते हैं और अपनी कार्यप्रणाली में क्या ठोस सुधार करते हैं।
रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लागू किए गए रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी कानून को लेकर हाल में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों ने नई बहस को जन्म दिया है। उद्योग जगत और उपभोक्ता संगठनों का मानना है कि अदालत की यह टिप्पणी कानून की मूल भावना पर सवाल नहीं उठाती, बल्कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
साया ग्रुप के प्रबंध निदेशक विकास भसीन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां नियामक प्रणाली को और सुदृढ़ करने के लिए उत्प्रेरक का काम कर सकती हैं। उनके अनुसार, यदि कानून में व्यावहारिक और सकारात्मक संशोधन किए जाएं तथा सभी राज्यों में एक समान तरीके से इसका पालन सुनिश्चित किया जाए, तो निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा। इससे रियल एस्टेट क्षेत्र में जिम्मेदार और संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा।
डेवलपर्स के लिए बढ़ेगी जवाबदेही
अश्विन शेठ ग्रुप के मुख्य व्यवसाय अधिकारी भाविक भंडारी का मानना है कि संभावित बदलावों के संकेत से डेवलपर्स को अपनी कार्यशैली में और अधिक अनुशासन लाना होगा। उनका कहना है कि शासन व्यवस्था, पूंजी प्रबंधन और समयबद्ध परियोजना निष्पादन पर विशेष ध्यान देना अब अनिवार्य हो जाएगा। इससे परियोजनाओं में देरी और अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा।
आंकड़े क्या बताते हैं
आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, कानून लागू होने के आठ वर्षों में देशभर में 99 हजार से अधिक परियोजनाएं और 1.12 लाख से ज्यादा रियल एस्टेट एजेंट पंजीकृत हो चुके हैं। पंजीकृत परियोजनाओं की संख्या में महाराष्ट्र सबसे आगे है, जहां 50 हजार से अधिक परियोजनाएं दर्ज हैं। इसके बाद गुजरात का स्थान है, जहां 7,500 से अधिक परियोजनाएं रेरा के तहत पंजीकृत हैं। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि कानून को व्यापक स्तर पर अपनाया गया है, लेकिन प्रभावशीलता का सवाल अब भी बना हुआ है।

