नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच भारत में कच्चे तेल के आयात पर असर पड़ा है। इसे देखते हुए कुछ दिनों पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को 30 दिन तक रूसी तेल खरीदने की छूट दी है।
इस छूट के बाद भारत ने रूसी तेल खरीदना शुरू भी कर दिया है, लेकिन पेमेंट को लेकर संकट पैदा हो सकता है। Oilprice.com के मुताबिक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) रूसी तेल का पेमेंट करने से बच रहा है।
यूक्रेन पर हमले को लेकर अमेरिका ने कुछ रूसी तेल कंपनियों पर बैन लगाया था। बाद में ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने के कारण भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। बाद में भारत ने रूस से तेल खरीदना काफी कम कर दिया था। इससे पहले भारत रूस से सस्ती कीमत पर तेल खरीद रहा था। ट्रेड डील के दौरान ट्रंप ने कहा था कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा। इसके बाद से कई भारतीय बैंक रूसी तेल कंपनियों को पेमेंट करने से बच रहे हैं।
क्यों जोखिम नहीं लेना चाहता एसबीआई
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार SBI अपनी वैश्विक प्रतिष्ठा और अमेरिकी बाजार में अपने हितों को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता। इसके मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
- अल्पकालिक छूट: अमेरिका की ओर से दी गई यह छूट वर्तमान में केवल एक महीने के लिए है। बैंक इस बात को लेकर अनिश्चित है कि एक महीने बाद अमेरिका की ओर से मिली यह छूट आगे बढ़ेगी या नहीं।
- अमेरिकी बाजार में बड़ा निवेश: SBI के इंटरनेशनल लोन पोर्टफोलियो का 26% हिस्सा अकेले अमेरिका में है। बैंक अपने इस बड़े कारोबार को किसी भी तरह के प्रतिबंधों या कानूनी उलझनों से बचाना चाहता है।
- भारत पर बढ़ा आपूर्ति का दबाव
पिछले साल अमेरिका ने रूसी ऊर्जा कंपनियों Rosneft और Lukoil पर बैन लगाया था। इसके बाद कुछ भारतीय बैंक रूसी तेल व्यापार के वित्तपोषण पर विचार कर रहे थे। हालांकि SBI अब भी रूसी कच्चे तेल से जुड़े पेमेंट से दूरी बनाए हुए है।

