नई दिल्ली। अमेरिका से ट्रेड डील के बाद अब भारत के सामने रूस से तेल खरीदने की पाबंदी का तोड़ निकालने की बड़ी समस्या है। भारतीय रिफाइनरी कंपनियों को अब रूस से तेल पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने की शर्त को मानने के लिए विंड डाउन पीरियड की जरूरत है।
दरअसल, अगर रूस से तेल आयात पूरी तरह रुकता है तो इन कंपनियों ने जो तेल खरीद रखे हैं, उनकी आपूर्ति मार्च तक ही हो पाएगी। ऐसे में अगर सरकार इसे रोकने का आदेश देती है तो उन्हें यह ट्रांजीशन पीरियड चाहिए होगा।
भारतीय रिफाइनर्स ने फरवरी में तेल टैंकरों के लिए कार्गो बुक किए हैं, जो मार्च तक ही पहुंच पाएंगे। ऐसे में इन कंपनियों को मार्च तक की मोहलत चाहिए, ताकि जो करार ये कर चुकी हैं, वो समय रहते पूरी की जा सकें।
भारत-अमेरिका के बीच जो ट्रेड डील हुई है, उसमें यह बड़ी शर्त है कि भारत रूस से तेल आयात पूरी तरह से रोक देगा। इस डील के तहत अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 50 फीसदी टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया है। अब भारत को रूस के बजाय अमेरिका और उसके द्वारा नियंत्रित वेनेजुएला से तेल खरीदना होगा।
2022 में यूक्रेन में युद्ध छिड़ने के बाद से भारत अभी तक रूस से डिस्काउंटेड क्रूड ऑयल का टॉप बॉयर रहा है। इससे रूस से तेल खरीदने की एवज में अमेरिका ने भारत पर सख्त टैरिफ लाद दिए थे।
अमेरिका चाहता है कि रूस तेल बेचकर यूक्रेन युद्ध में लगा रहा है, जिससे युद्ध को फंडिंग की जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा किया कि उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी से कहा कि वह रूस से तेल खरीद बंद करने पर राजी हो गए हैं। वह अमेरिका और वेनेजुएला से अब तेल खरीदेंगे।
आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी पाबंदी के चलते भारत का रूस से तेल आयात बीते दो साल में दिसंबर, 2025 में अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया था। उस वक्त पेट्रोलियम उत्पादक देशों के संगठन OPEC का शेयर बीते 11 महीनों में बढ़ा है।
कहां से तेल लेकर आ रहीं भारतीय कंपनियां
भारतीय रिफाइनरी कंपनियां अब ज्यादा से ज्यादा कच्चा तेल मिडिल ईस्टर्न, अफ्रीकी और दक्षिण अमेरिकी देशों से खरीद रही हैं। उन्होंने पहले ही अमेरिकी पाबंदी के चलते रूस से तेल खरीदना कम कर दिया था।

