रूस से भारत आ रहा तेल टैंकर अमेरिकी दबाव में लौटा, जानिए अब क्या होगा

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"Close up aerial photo of a large oil tanker, with an oil rig in the far distance."

नई दिल्ली/मॉस्को। Russian Oil Imports to India: रूस से कच्चा तेल लेकर भारत जा रहे एक टैंकर जहाज ने बाल्टिक सागर में अचानक अपना रास्ता बदल लिया है। इससे भारत और रूस के बीच तेल व्यापार में संभावित व्यवधानों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। ब्लूमबर्ग ने बुधवार को यह खबर दी।

यह कदम रूसी तेल कंपनियों पर नए अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद उठाया गया है, जिससे भारतीय रिफाइनरियों में अनिश्चितता बढ़ गई है, जो रूसी आपूर्ति पर भारी छूट पर निर्भर हैं।

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत से लगातार रूस से तेल नहीं खरीदने की धमकी दे रहे हैं। इसे लेकर उन्होंने भारत पर भारी टैरिफ भी लगा दिया था। इससे पहले भारत की इंडियन ऑयल कॉरपोरशन ने कहा था कि वह अमेरिकी पाबंदी का पालन करने के लिए तैयार है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, फ्यूरिया नाम के इस जहाज ने रूस के प्रिमोर्स्क बंदरगाह से लगभग 7,30,000 बैरल यूराल कच्चा तेल लादा था और शुरुआत में गुजरात में भारत के सिक्का बंदरगाह पर इसे उतरना था। हालांकि, डेनमार्क और जर्मनी के बीच फेहमर्न बेल्ट पहुंचने के बाद टैंकर ने अपना रास्ता बदल लिया और बाद में अपना गंतव्य मिस्र के पोर्ट सईद में बदल दिया। यह बदलाव संभवत: नए अमेरिकी पाबंदियों के चलते हुई है।

21 नवंबर तक अमेरिका ने दी है डेडलाइन
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस पर छपी खबर के अनुसार, रोसनेफ्ट और लुकोइल सहित प्रमुख रूसी ऊर्जा कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत 21 नवंबर तक सभी चालू लेनदेन समाप्त करने होंगे। इससे भारत की रूसी तेल की बड़े पैमाने पर खरीद जारी रखने की क्षमता पर संकट के बादल छा गए हैं, जो 2022 से उसकी ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का एक प्रमुख घटक बन गया था।

रिफाइनरियों पर असर
भारतीय निजी और सरकारी दोनों रिफाइनरीज अब रूसी आपूर्तिकर्ताओं के साथ अनुबंधों की समीक्षा कर रहे हैं। शुरुआती संकेत बताते हैं कि भारत में रूसी तेल आयात में तेजी से गिरावट आ सकती है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां मिलकर देश की अधिकांश रिफाइनिंग क्षमता का प्रतिनिधित्व करती हैं। इन कंपनियों पर इसका असर पड़ सकता है।