रूस की आर्थिक हालत खस्ता, बेच डाला 60 फीसदी गोल्ड रिजर्व, जानिए क्यों

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मॉस्को। Russia Oil India: अमेरिका और पश्चिम के प्रतिबंधों के चलते रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई में भारी गिरावट आई है, जिसमें रूसी अर्थव्यवस्था भारी संकट से गुजर रही है। पिछले साल रूस की ऊर्जा निर्यात से कमाई महामारी के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थी।

इस गिरावट की भरपाई के लिए रूस अपने नेशनल वेल्थ फंड (NFW) से विदेशी करेंसी और सोने की बिक्री में तेजी से बढ़ोतरी करेगा। रूस यह कदम ऐसे समय में उठाने जा रहा है जब रिपोर्टों के अनुसार उसके प्रमुख ऊर्जा खरीदार और दोस्त भारत ने रूसी तेल के आयात में भारी कमी की है।

मॉस्को टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रूसी वित्र मंत्रालय बजट नियम के तहत 16 जनवरी से 5 फरवरी तक रोजाना 12.8 अरब रूबल (165 अरब डॉलर) के चीनी युआन और सोने की बिक्री करेगा। कुल मिलाकर यह 192.1 अरब रूबल (2.48 अरब डॉलर) की बिक्री होगी। रिपोर्ट में इंटरफैक्स के हवाले से बताया गया है कि यह इस तरह का अब तक का सबसे बड़ा वॉल्यूम होगा।

यह कोविड-19 संकट के दौरान से भी ज्यादा है। उस समय रोजाना लगभग 11.4 अरब रूबल की संपत्ति बेची जा रही थी।इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह रूसी कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ते डिस्काउंट से जुड़ी है। दिसम्बर में तेल की औसत कीमत गिरकर लगभग 39 डॉलर प्रति बैरल हो गई।

2026 का बजट बनाते समय इसके 59 डॉलर प्रति बैरल होने का अनुमान लगाया गया था। अल्फा बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट नतालिया ओर्लोवा ने कहा कि ‘तेल की मौजूदा कीमतों को देखते हुए इस साल तेल और गैस से होने वाली कमाई पर दबाव बने रहने की संभावना है।’

साल की शुरुआत में रूस के नेशनल वेल्थ फंड (NFW) के पास 52.9 अरब डॉलर की लिक्विड एसेट्स थीं। यूक्रेन पर हमले से पहले NFW के पास 113.5 अरब डॉलर की लिक्विड एसेट्स थीं, जिसमें 405 मीट्रिक टन सोना शामिल था। सरकार ने पिछले लगभग चार सालों में फंड का लगभग 60 प्रतिशत सोना बेच दिया है। दिसम्बर 2025 में यह होल्डिंग्स घटकर 173 मीट्रिक टन रह गई थी।

भारत ने रूसी तेल खरीदना किया कम
यूक्रेन पर रूस का हमला शुरू होने के बाद से भारत रूसी तेल का बड़ा खरीदार बनकर उभरा था। हालांकि, हाल के महीनों में इसमें भारी कमी आई है। भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है या इसमें बड़ी कटौती कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर और टैक्स लगाने की धमकी दी थी। पिछले साल ही ट्रंप ने रूसी तेल खरीद के लिए भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाया था, इससे अमेरिका जाने वाले भारतीय सामानों पर कुल टैरिफ 50 फीसदी पहुंच गया है।