रूस कर रहा अंधेरे में समुद्र के बीचों-बीच बड़ा खेल; अमेरिका बेबस, जानिए क्यों

0
15

नई दिल्ली। अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर 25% का अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। हाल के दिनों में भारत ने रूस से तेल की खरीदारी कम की है लेकिन रूस अब भी भारत के लिए क्रूड का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है।

रूस के तेल पर अमेरिका और पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगा रखा है। इस बीच अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला करके वहां के तेल को बेचना शुरू कर दिया है। साथ ही ईरान पर प्रतिबंध और बढ़ाने की बात कही है।

इससे शैडो फ्लीट या डार्क फ्लीट एक बार फिर चर्चा में है। यह टैंकरों का एक ऐसा नेटवर्क होता है जिनका यूज रूस, ईरान और वेनेजुएला के प्रतिबंधित तेल का कारोबार होता है। एक अनुमान के मुताबिक इसका साइज ग्लोबल टैंकर की कुल क्षमता को करीब 18.5% है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह बिजनेस कितना बड़ा है।

तेल का इस काले खेल का सबसे बड़ा खिलाड़ी रूस है। डार्क फ्लीट में अक्सर पुराने जहाजों का यूज किया जाता है। इनमें से ज्यादातर पश्चिमी देशों की कंपनियों के होते हैं। ये अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को चकमा देने के लिए कई तरह के अवैध तरीके अपनाते हैं।

इनमें फर्जी झंडे लगाना, फर्जी लोकेशन भेजना, बार-बार नाम बदलना और जीपीएस सैटेलाइट से बचने के लिए ट्रांसपोंडर बंद करना शामिल है। इन जहाजों का ऑनरशिप स्ट्रक्चर इतना जटिल होता है कि उन्हें पकड़ पाना आसान नहीं होता है।

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद ऐसे जहाजों की संख्या में बड़ी तेजी आई है। ये जहाज रूस के बाल्टिक और ब्लैक सी बंदरगाहों से तेल लेकर जाते हैं और इससे रूस को सालाना अरबों डॉलर की कमाई होती है।

सेलर और बायर
रूस और ईरान ग्लोबल मार्केट में प्रतिबंधित कच्चे तेल के प्रमुख विक्रेता हैं जबकि खरीदारों में भारत और चीन सबसे ऊपर हैं। Kpler के अनुसार 2025 के अंतिम तीन महीनों में भारत और चीन ने शेडो फ्लीट से करीब 20 फीसदी कच्चा तेल खरीदा। S&P की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। यह तेल चीन तक एक अस्पष्ट प्रक्रिया के जरिए पहुंचता है। ईरानी कच्चे तेल ले जाने वाले जहाज दक्षिण पूर्व एशिया के तटीय इलाकों में दूसरे जहाजों में अपना माल शिफ्ट करते हैं। फिर ये जहाज चीनी बंदरगाहों की ओर बढ़ते हैं।