रुपया कमजोर होने एवं आयात महंगा पड़ने से तेल से लेकर साबुन तक के दाम बढ़े

0
6

नई दिल्ली। FMCG Inflation: देश में महंगाई फिर लौट आई है। एफएमसीजी यानी रोजमर्रा के सामान बनाने वाली कंपनियां अब अपनी चीजों के दाम बढ़ाने लगी हैं। इनमें तेल से लेकर साबुन तक शामिल हैं।

कंपनियों ने सितंबर 2025 में जीएसटी में कटौती के बाद चीजों की कीमत नहीं बढ़ाई थी। लेकिन अब बढ़ती महंगाई और कमजोर होते रुपये की वजह से उनके मुनाफे पर असर पड़ रहा है।

इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक इसलिए कंपनियां रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजों की 5% तक कीमतें बढ़ा रही हैं। डिस्ट्रिब्यूटर्स ने बताया कि इस तिमाही में डिटर्जेंट, हेयर ऑयल, चॉकलेट, नूडल्स और अनाज जैसे रोजमर्रा के इस्तेमाल होने वाले सामानों की कीमत बढ़ गई है। बढ़ी हुई कीमतों के साथ इस चीजों के पैकेट दुकानों तक पहुंचने लगे हैं।

कंपनियों ने बताया कीमत बढ़ाने का कारण
डाबर इंडिया के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने बताया कि उनकी कंपनी, जो रियल जूस और वाटिका हेयर ऑयल बनाती है, इस तिमाही में 2% कीमतें बढ़ा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ये बढ़ी हुई कीमतें अगले साल भी जारी रहेंगी। उन्होंने बताया, ‘हमें एंटी-प्रॉफिटियरिंग (मुनाफेखोरी विरोधी) नियमों की वजह से कीमतें बढ़ाने में देरी करनी पड़ी थी।’

कीमतें बढ़ने के कारण

  • हाल के हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे सल्फर और एन-पैराफिन जैसे जुड़े हुए सामानों की लागत भी बढ़ गई है। वहीं, नारियल तेल की कीमतें पिछले साल दोगुनी हो गई हैं।
  • रुपये के कमजोर होने से भी सामानों को बनाने की लागत बढ़ गई है। रुपया कई महीनों से लगातार गिर रहा है और 30 जनवरी को डॉलर के मुकाबले यह 92.02 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था। इसका मुख्य कारण व्यापार घाटा और वैश्विक आर्थिक असंतुलन है।

चीजों पर रुपये का असर क्यों और कैसे?
ब्रेकफास्ट सीरियल्स, मूसली और ओट्स बनाने वाली कंपनी बैगरीज (Bagrry’s) के ग्रुप डायरेक्टर आदित्य बैगरी ने कहा कि ओट्स और बादाम जैसे नाश्ते के सामानों में इस्तेमाल होने वाली बहुत सारी सामग्री आयात की जाती है। रुपये के गिरने से आयात की लागत काफी बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी इस तिमाही में चुनिंदा पैकेटों पर कीमतों में मामूली बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है।

साबुन, शैम्पू, डिटर्जेंट और पर्सनल केयर प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियां काफी हद तक कच्चे तेल से बनने वाले प्रोडक्ट पर निर्भर करती हैं। इससे लिक्विड पैराफिन और सर्फेक्टेंट जैसे जुड़े हुए सामानों की लागत पर असर पड़ता है।