जयपुर। बांदीकुई SDM रही पिंकी मीणा के रिश्वतखोरी के राज खुलने लगे हैं। ACB कोर्ट में दायर की गई 4 हजार पन्नों की चार्जशीट के मुताबिक मीणा ने रिश्वत के लिए ग्राउंड तैयार करने में किसी की परवाह नहीं की। उसने रिश्वत के लिए देश के ग्रोथ इंजन भारतमाला प्राजेक्ट को ही रोक दिया था।
केंद्र सरकार के उपक्रम NHAI से ठेकेदार की तरह बर्ताव किया। हाईवे के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया ठप कर दी। NHAI ने इस बारे में पिंकी मीणा को लंबित मामलों का भुगतान करने का आग्रह किया। इस पर जवाबी पत्र में मीणा ने लिखा- आपको न्यायालय प्रक्रिया की जरूरी जानकारी नहीं है। इस तरह उसने NHAI को ही धमका दिया।
हाईवे कंपनी से मोटी रिश्वत वसूलने में पिंकी मीणा ने डिले टैक्टिस का सहारा लिया। एसीबी जांच में सामने आया है कि हाईवे निर्माण कंपनी को दो साल में काम पूरा करने की डेडलाइन NHAI से मिली थी। इस डेडलाइन में काम पूरा नहीं करने पर करोड़ों की पैनाल्टी कंपनी को भुगतनी पड़ती। हाईवे का काम तभी आगे बढ़ सकता था जब पिंकी मीणा जमीन का कब्जा सौंपती। पिंकी मीणा ने इसी का फायदा उठाकर जमीन अधिग्रहण में देरी की। 20 नवंबर 2019 को काम शुरू हुआ, दो साल के हिसाब से नवंबर 2021 तक काम पूरा करना है। ACB चार्जशीट के मुताबिक पिंकी मीणा ने कंपनी को मिली डेडलाइन को देखते हुए रिश्वत के लिए दबाव बनाया। इसी डिले टैक्टिस के जरिए पुष्कर मित्तल ने भी घूस मांगी।
चार्जशीट में पिंकी मीणा और दौसा के तत्कालीन एसडीएम पुष्कर मित्तल के भ्रष्ट कारनामों का पूरा ब्योरा है। एसीबी ने चार्जशीट में लिखा कि भारतमाला प्राजेक्ट समय पर पूरा हो इसके लिए हाईवे कंपनी को स्थानीय सहयोग मिलना जरूरी था। लेकिन पिंकी मीणा ने NHAI के बार-बार पत्र लिखने के बावजूद जमीन अधिग्रहण सहित किसी भी प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ने दिया। NHAI ने पिंकी मीणा को कई बार चिट्ठी लिख जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में मदद करने को कहा।
15 दिसंबर 2020 को ही NHAI ने भूमि अधिग्रहण अधिकारी पिंकी मीणा को हाईवे बनाने के लिए अधिग्रहित जमीन का कब्जा दिलवाने के लिए लिखा। इस चिट्ठी में 67.73 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि जमा करवाने के बाद भी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने का जिक्र था। 15 दिन में दूसरी बार 30 दिसंबर 2020 को भी NHAI ने चिट्ठी लिख हाईवे बनाने के लिए रास्ते में पड़ रहे मकानों और कुछ स्ट्रक्चर को हटाने के लिए पुलिस सहायता मांगी। रास्ते में पड़ने वाले मकान और स्ट्रक्चर की मुआवजा राशि भी जमा करवाई जा चुकी थी।
नेशनल हाईवे एक्ट को रखा ठेंगे पर
जांच में सामने आया कि पिंकी मीणा ने रिश्वत के लिए माहौल बनाने में नेशनल हाईवे एक्ट तक को ताक पर रख दिया। एसीबी के आरोप पत्र के मुताबिक, पिंकी मीणा ने गलत आशय से NHAI और हाईवे निर्माण कंपनी के बार-बार आग्रह के बावजूद जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई। जांच में यह पाया गया कि जमीन जान बूझकर उपलब्ध नहीं करवाई ताकि रिश्वत का ग्राउंड तैयार हो सके।
रिश्वत के लिए पिंकी मीणा ने रोका मुआवजा
मुआवजा राशि बांटने का काम भूमि अधिग्रहण अधिकारी यानी पिंकी मीणा का था। यह उसकी जिम्मेदारी थी। एसीबी की चार्जशीट के मुताबिक, NHAI ने जमीन अधिग्रहण के बदले मुआवजे के 94.37 करोड़ रुपए बांदीकुई एसडीएम के सरकारी संयुक्त खाते में जमा करवा दिए थे, लेकिन किसानों को मुआवजा नहीं बांटा गया। मुआवजा बांटे बिना जमीन अधिग्रहण रुक गया और जमीन NHAI को नहीं मिलने से हाईवे कंपनी का काम रुक गया। रिश्वत देने के लिए इस तरह कंपनी को मजबूर किया गया।

