मुम्बई। चालू मार्केटिंग सीजन के शुरुआती दो महीनों में खाद्य तेलों के आयात की एक खास विशेषता रही कि रिफाइंड तेल नगण्य मात्रा में मंगाया गया। नवम्बर 2025 में 3500 टन आरबीडी पामोलीन का आयात हुआ था जबकि दिसम्बर में इसका आयात शून्य रहा।
लम्बे समय के बाद यह पहला अवसर था जब किसी एक माह (दिसम्बर 2025) में रिफाइंड पामोलीन का आयात बिल्कुल नहीं हुआ। नवम्बर-दिसम्बर 2024 के दो महीनों में देश के अंदर 5.17 लाख टन रिफाइंड खाद्य तेल का आयात हुआ था जो नवम्बर-दिसम्बर 2025 में लुढ़ककर मात्र 3500 टन पर सिमट गया।
उल्लेखनीय है कि 2024-25 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) के दौरान देश में 17,37,228 टन रिफाइंड खाद्य तेल (मुख्यतः) आरबीडी पामोलीन) का आयात हुआ था जबकि इसकी मात्रा 2023-24 के सीजन में 19,31,254 टन, 2022-23 में 21,06,645 टन तथा 2021-22 के सीजन में 18,40,540 टन दर्ज की गई थी।
समझा जाता है कि शुल्कान्तर ज्यादा होने से रिफाइंड पामोलीन के आयात में भारतीय खरीदारों की दिलचस्पी घटती जा रही है क्योंकि स्थलीय अथवा सीमामार्ग से नेपाल से इसका शुल्क मुक्त आयात होने से कीमतों में प्रतिस्पर्धा ज्यादा रहती है।
भारत में सामुद्रिक मार्ग से आरबीडी पामोलीन का आयात मुख्यतः इंडोनेशिया एवं मलेशिया से होता है जबकि थोड़ा-बहुत आयात थाईलैंड से भी हो। वर्तमान समय में वहां से इसका आयात करना आर्थिक दृष्टि से ज्यादा लाभप्रद साबित नहीं हो रहा है।
दूसरी ओर भारतीय रिफाइनर्स क्रूड डिगम्ड सोयाबीन तेल एवं क्रूड सूरजमुखी तेल के आयात को विशेष प्राथमिकता दे रहे हैं जबकि क्रूड पाम तेल (सीपीओ) का आयात सामान्य ढंग से जारी है। सोयाबीन तेल का आयात मुख्यतः अर्जेन्टीना एवं ब्राजील से तथा सूरजमुखी तेल का आयात रूस, यूक्रेन एवं अर्जेन्टीना जैसे देशों से हो रहा है और आगे भी होता रहेगा।

