जयपुर। राजस्थान हाई कोर्ट ने 2021 की सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा को लेकर अपना ऐतिहासिक और अंतिम फैसला सुना दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा की अगुवाई वाली खंडपीठ ने साफ कर दिया है कि यह परीक्षा अब पूरी तरह से रद्द ही रहेगी।
गौरतलब है कि अदालत का यह फैसला रातों-रात नहीं आया है। काफी लंबे समय से चली आ रही थकाऊ कानूनी जद्दोजहद के बाद हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के उस फैसले को एकदम सही ठहराया है जिसमें परीक्षा को रद्द करने का आदेश जारी किया गया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने दो टूक लफ्जों में कहा कि इस स्टेज पर आकर परीक्षा की छंटनी करना किसी भी लिहाज से मुमकिन नहीं है। धांधली की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी थीं और पेपर लीक का जहर सिस्टम में इस कदर फैल चुका था कि सही और गलत उम्मीदवारों को अलग करना भूसे के ढेर से सुई ढूंढने जैसा हो गया था। इसलिए, पूरी की पूरी परीक्षा को ही रद्द करना मुनासिब समझा गया।
हालांकि, इस पूरे बवाल में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के सदस्यों को एक छोटी सी कानूनी राहत जरूर मिल गई है। सिंगल बेंच ने RPSC सदस्यों के खिलाफ जो स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ी टिप्पणियां की थीं, उसे डिवीजन बेंच ने किनारे कर दिया है।
याचिकाकर्ताओं की तरफ से मजबूती से पैरवी कर रहे वकील हरेंद्र नील ने भी कोर्ट के बाहर आकर इस बात की तस्दीक की। उन्होंने साफ किया कि कोर्ट ने सिंगल जज के फैसले को ही कायम रखा है और अब इस भर्ती के दोबारा जिंदा होने की कोई गुंजाइश नहीं बची है।
अगर हम वक्त के पन्नों को थोड़ा पीछे पलटें और इस भर्ती के सफर को देखें तो इसकी शुरुआत 3 फरवरी 2021 को हुई थी। उस दिन RPSC ने 859 पदों के लिए SI भर्ती का बहुप्रतीक्षित नोटिफिकेशन जारी किया था। इसे देखकर पूरे सूबे के बेरोजगार युवाओं में खुशी की लहर दौड़ गई थी।
करीब 7.97 लाख उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाने के लिए फॉर्म भरे। 13 से 15 सितंबर 2021 के बीच कड़े इम्तिहान का दौर चला और तकरीबन 3.8 लाख बच्चे परीक्षा देने सेंटर्स पर पहुंचे। इनमें से 20,359 युवाओं ने अपनी पसीने की कमाई से ग्राउंड पर पसीना बहाकर फिजिकल टेस्ट पास किया और 3,291 खुशकिस्मत उम्मीदवार इंटरव्यू के आखिरी पड़ाव तक पहुंचे।
1 जून 2023 को जब फाइनल रिजल्ट आया, तो सब कुछ ठीक लग रहा था। कुछ घरों में ढोल बज रहे थे लेकिन किसी को नहीं पता था कि अंदर ही अंदर एक कितना बड़ा और गंदा खेल खेला जा चुका है।
धीरे-धीरे धांधली की सड़ांध बाहर आने लगी। चारों तरफ से आरोप लगने लगे कि पेपर लीक माफिया ने सिस्टम को दीमक की तरह चाट लिया है। जब बात हद से आगे बढ़ गई और युवाओं का गुस्सा सड़कों पर फूटने लगा, तो मामले की जांच स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) को सौंपनी पड़ी। SOG की जांच में जो खौफनाक खुलासे हुए, उसने पूरे राजस्थान की राजनीति और प्रशासनिक महकमे में भूचाल ला दिया।
यह जानकर सबके होश फाख्ता हो गए कि RPSC के कुछ बड़े और जिम्मेदार अधिकारी ही इस पूरे गोरखधंधे के मास्टरमाइंड थे। मामला इतना गरमाया कि RPSC के सदस्य रामूराम राइका और बाबूलाल कटारा जैसे रसूखदार लोगों की भी पोल खुल गई और उन्हें सीधे सलाखों के पीछे जाना पड़ा।
कब दायर हुई थी याचिका
13 अगस्त 2024 को परीक्षा रद्द करने की याचिका दायर की गई। जोरदार बहसों के बाद 28 अगस्त 2025 को सिंगल जज बेंच ने बिना लाग लपेट के परीक्षा रद्द कर दी। लेकिन जो उम्मीदवार सिलेक्ट हो चुके थे और ट्रेनिंग कर रहे थे, उन्होंने इस फैसले को तुरंत डिवीजन बेंच में चुनौती दे डाली। 8 सितंबर को डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी, जिससे मामला और उलझ गया। हार मानकर याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचे। देश की सबसे बड़ी अदालत ने इस मामले की गंभीरता को समझा और 24 सितंबर को सिंगल जज के फैसले पर ही अपनी मुहर लगाई।

