जयपुर। राजस्थान विधानसभा में पेश 2026-27 के बजट में किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। डिप्टी सीएम एवं वित्त मंत्री दीया कुमारी ने बजट में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए कुल ₹11,300 करोड़ का प्रावधान किया है। इस प्रावधान का उद्देश्य वर्ष 2047 तक राजस्थान को टेक्नोलॉजी आधारित अग्रणी कृषि शक्ति के रूप में विकसित करना है।
बजट में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि विकास को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार ने किसानों की क्षमता विकास, कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग, और मार्केटिंग को सुदृढ़ करने के लिए प्रभावी कदम उठाने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत किसानों को डिजिटल कृषि उपकरण, स्मार्ट फार्मिंग तकनीक और वैज्ञानिक बीज एवं उर्वरक प्रदान किए जाएंगे।
सिंचाई, पशुधन और डेयरी क्षेत्र को मिलेगा बल
राजस्थान सरकार ने घोषणा की है कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, पशुधन और डेयरी क्षेत्र के सशक्तीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि प्रदेश की कृषि उत्पादन क्षमता में भी सुधार होगा। सूक्ष्म सिंचाई के क्षेत्र में आगामी वर्ष में करीब 3 लाख हेक्टेयर भूमि को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए लगभग ₹1,340 करोड़ का व्यय किया जाएगा, जिससे सीधे तौर पर लगभग 3 लाख किसानों को लाभ पहुंचेगा। वर्तमान में सूक्ष्म सिंचाई के तहत केवल 24% सकल बोए क्षेत्र आता है, जिसे सरकार 51% तक बढ़ाने का लक्ष्य रख रही है।
शेखावाटी क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक पहल
बजट में यमुना जल परियोजना को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। शेखावाटी क्षेत्र के जिलों – सीकर, झुंझुनू और चूरू सहित – की 30 वर्षों से लंबित पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए यह ऐतिहासिक पहल है। हरियाणा के साथ हुए एमओयू के तहत राजस्थान को अपने हिस्से का पानी सुनिश्चित किया गया है। फतनीकुंड बैराज से शेखावाटी क्षेत्र तक यमुना जल लाने की परियोजना शीघ्र शुरू की जाएगी। इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹32,000 करोड़ है और इससे लाखों ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध होगा।
कृषि को भविष्य के लिए तैयार करना
राजस्थान सरकार का उद्देश्य है कि वर्ष 2047 तक प्रदेश टेक्नोलॉजी-ड्रिवन कृषि शक्ति के रूप में उभरे। इसके लिए बजट में किसानों के प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, डिजिटल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म और कृषि विज्ञान केंद्रों के विस्तार का प्रस्ताव रखा गया है। इससे न केवल उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि किसानों की आय और उनके जीवन स्तर में भी सुधार आएगा।

