राजस्थान के भपंग और अलगोजा के सुर साधक को पद्म श्री, जानिए क्यों

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जयपुर। राजस्थान के दो लोक कलाकारों को ‘अनाम नायकों’ की श्रेणी के तहत रविवार को पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पुरस्कार पाने वालों में राजस्थान के मेवात के 68 साल के गफरुद्दीन मेवाती जोगी शामिल हैं। वह भपंग बजाते हैं। वहीं, जैसलमेर के पास मूल सागर के निवासी तागा राम भील अलगोजा बजाते हैं।

जोगी ने चार साल की उम्र में अपने पिता से यह वाद्य यंत्र सीखना शुरू किया था। उन्होंने कहा कि मेवाती जोगी समुदाय की पारंपरिक संस्कृति हिंदू और मुस्लिम का मिश्रण है। मैं पिछले 50 वर्षों से पांडुन का कड़ा गाना गा रहा हूं। मुझे 2500 से अधिक दोहे याद हैं, जिनमें विशेष रूप से महाभारत की विभिन्न कहानियों का वर्णन है। यह मुझे अपने परिवार से विरासत में मिली हैं।

2024 में जोगी को विश्व भर में इस ग्रामीण लोक कला को बढ़ावा देने में उनके योगदान के लिए दिल्ली के संगीत नाटक अकादमी में राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया था। उन्होंने अपने करियर के दौरान ऑस्ट्रेलिया और कनाडा सहित कई देशों में प्रस्तुति दी है। उन्होंने 2011 में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के जन्मदिन पर लंदन में एक विशेष प्रस्तुति भी दी थी।

गफरुद्दीन ने कहा कि मैंने 2022 में दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई फिल्म अभिनेताओं के सामने भी प्रस्तुति दी थी। पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित होना मेरे लिए गौरव की बात है। यह पुरस्कार मुझे इस दुर्लभ लोक कला को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद करेगा।

वहीं, मूल सागर में शहर के बाहर एक शांत बुटीक होटल में रह रहे तागा राम भील अपने पसंदीदा वाद्य यंत्र अलगोजा बजाते हैं। वह भील समुदाय से संबंध रखते हैं। यह एक आदिवासी समूह है जिसे परंपरागत रूप से राजपूत माना जाता है। भील पहले चरवाहा भी थे। उन्होंने बचपन में अपने पिता के वाद्य यंत्र पर छुपकर अभ्यास करके अलगोजा बजाना सीखा और 10 साल की उम्र से ही प्रस्तुति दे रहे हैं।

भील ने कहा कि मैंने अपने जीवन के 30 साल रणथंभौर के जंगलों में बिताए हैं। वहां मैं अलगोजा बजाता था। मुझे अपना पहला अलगोजा 11 साल की उम्र में मिला और मैंने अपने पिता से सीखना शुरू किया। 1981 में मैंने मात्र 18 वर्ष की आयु में जैसलमेर में अपना पहला मंच प्रदर्शन दिया। मैंने एआईआर, जैसलमेर और नेहरू युवा केंद्र संस्थान (एनवाईकेएस) के लिए भी विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत किए हैं।

भील ने 1996 में अपने पहले अंतरराष्ट्रीय दौरे के लिए फ्रांस का रुख किया। तब से उन्होंने यूरोप के 15 देशों के साथ-साथ सिंगापुर, रूस, जापान, अफ्रीका और संयुक्त राज्य अमेरिका में शो और कार्यशालाओं में प्रस्तुति दी है। अलगोजा अलावा वे मटका और बांसुरी भी बजाते हैं।