इडुक्की। दक्षिण भारत के दोनों शीर्ष उत्पादक राज्यों – केरल तथा तमिलनाडु में मानसून की अच्छी वर्षा होने तथा मौसम की हालत अनुकूल रहने से छोटी इलायची की फसल को फायदा होने से आसार हैं
और इसकी तुड़ाई-तैयारी भी गत वर्ष की तुलना में इस बार जल्दी शुरू होने की उम्मीद है इसे देखते हुए उत्पादकों ने नीलामी में अपने पुराने स्टॉक को उतारने में अच्छी दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी है।
आमतौर मध्य जुलाई से छोटी (हरी) इलायची के नए माल की तुड़ाई-तैयारी आरंभ हो जाती है। पिछले कुछ विशेष कारणों से इसमें देर हो गई थी लेकिन इस बार वे कारण मौजूद नहीं है।
पिछले दिन कुमिली में आयोजित नीलामी में लगभग 37 टन इलायची की आवक हुई जो इससे पूर्व की नीलामी की आपूर्ति से ज्यादा रही। खरीदारों की अच्छी मांग भी देखी गई इसलिए औसत नीलामी मूल्य में कुछ सुधार दर्ज किया गया।
समझा जाता है कि दिसावरी व्यापारी निर्यातक इलायची का अच्छा स्टॉक बनाना चाहते हैं ताकि जुलाई से सितम्बर के दौरान जोरदार मानसूनी बारिश होने तथा यातायात प्रभावित होने से पूर्व ही जरूरत के लायक माल का स्टॉक प्राप्त कर लिया जाए।
अगले महीने से देश में त्यौहारी सीजन आरंभ होने वाला है जो कमोबेश नवम्बर तक जारी रहेगा। वैसे बरसात के चार महीनों में शादी-विवाह एवं अन्य मांगलिक उत्सवों का आयोजन वर्जित रहता है मगर पर्व-त्यौहारों की एक लम्बी श्रृंखला जारी रहती है। जिससे छोटी इलायची की मांग एवं खपत बढ़ जाती है।
भारतीय निर्यातकों को छोटी इलायची का निर्यात प्रदर्शन भी बेहतर रहने का भरोसा है क्योंकि वैश्विक स्तर पर मुख्य प्रतिद्वन्दी देश- ग्वाटेमाला में प्राकृतिक आपदाओं से फसल को हानि होने की सूचना मिल रही है जिससे खासकर पश्चिम एशिया एवं खाड़ी क्षेत्रों के देशों में भारतीय निर्यातकों को कुछ अग्रता या बढ़त मिल सकती है। भारतीय इलायची का दाम प्रतिस्पर्धी स्तर पर है।

