मार्केटिंग सीजन में खाद्य तेलों का आयात 167 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान

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कुआलालम्पुर। भारत में 2025-26 के मार्केटिंग सीजन में स्वदेशी स्रोतों से खाद्य तेलों का कुल उत्पादन 96 लाख टन पर अटकने की संभावना व्यक्त करते हुए एक अग्रणी उद्योग संस्था- इंडियन वैजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईबीपीए) ने विदेशी खाद्य तेलों का आयात बढ़कर 167 लाख टन पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया है।

कुआलालम्पुर (मलेशिया) में आयोजित एक कांफ्रेंस को सम्बोधित करते हुए एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि खाद्य तेलों के लिए विदेशी बाजारों पर भारत की भारी आवश्यकता बरकरार रहेगी और लगभग 60 प्रतिशत खाद्य तेल की घरेलू मांग एवं जरूरत को आयात के जरिए पूरा करना आवश्यक होगा।

एक अन्य विश्लेषक का मानना है कि यदि अमरीकी सोयाबीन तेल पर आयात शुल्क को कम या खत्म किया गया तो भारत में खाद्य तेलों का कुल आयात बढ़कर 170 लाख टन के आसपास पहुंच सकता है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष के अनुसार विभिन्न कारणों से खाद्य तेलों के वैश्विक बाजार मूल्य में भारी उतार-चढ़ाव का माहौल बना रहता है। जैव ईंधन निर्माण में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है जिससे खाद्य उद्देश्य के लिए इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल होती जा रही है।

बाजार की दिशा एवं दशा में बदलाव हो रहा है। भू राजनैतिक दबाव ने परम्परागत व्यापारिक मार्ग को परिवर्तित कर दिया है। इसके फलस्वरूप नीतियों अथवा सीमा शुल्क के ढांचे में मामूली परिवर्तन होने से भी खाद्य तेलों का भाव काफी संवेदनशील हो जाता है जिसका असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ने लगता है।

भारत मुख्यतः इंडोनेशिया एवं मलेशिया से पाम तेल, अर्जेन्टीना एवं ब्राजील से सोयाबीन तेल तथा रूस एवं यूक्रेन से सूरजमुखी तेल का आयात करता है। 2025-26 के मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) के दौरान भारत में 80-85 लाख टन पाम तेल, 50-55 लाख टन सोयाबीन तेल एवं 28-30 लाख टन सूरजमुखी तेल का आयात होने का अनुमान है। इसके अलावा 2 लाख टन खाद्य तेल का आयात नेपाल से भी हो सकता है।