मंदिरों में वीआईपी दर्शन व्यवस्था पर जमकर बरसे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

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कोटा। जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती आज कोटा प्रवास पर हैं। इस दौरान उनसे मिलने के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि गौमाता की रक्षा के लिए कोटा में कई प्रयोग हो रहे हैं।

उनके द्वारा हर विधानसभा में एक गौ-धाम की स्थापना की जा रही है। इसलिए हमारा यहां आना जरूरी था। हमें उम्मीद है कि कोटा गौमाता की रक्षा के लिए कई ऐसे कदम उठा रहा है, जिसकी सराहना की जानी चाहिए।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सनातन धर्म में दिखावा और पाखंड बढ़ रहा है। धर्म का कोई पालन नहीं करना चाहता और धार्मिक होने का दिखावा किया जा रहा है। इसे देखकर लोग धर्म से दूर होते जा रहे हैं।

इसी वजह से सनातन धर्म के बहुत नीचे चले जाने का खतरा उत्पन्न हो रहा है, इसलिए हमारे द्वारा यह मुहिम चलाई जा रही है, ताकि नकली हिंदूत्व पीछे जाए और असली धर्म सामने आए। साथ ही उन्होंने पाखंड करने वाले लोगों पर कहा कि उन्हें हमारी बात पसंद नहीं आती है। वे चाहते हैं कि जो वे कर रहे हैं, वही सही माना जाए। हमें कोई भी न रोके।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मंदिरों में वीआईपी दर्शन को लेकर कहा कि मंदिर इसलिए बनाए जाते हैं ताकि श्रद्धालु और उनके आराध्य के बीच की दूरी कम हो और सभी भक्त अपने आराध्य के पास रहें। दुनिया में भेदभाव हर जगह है, लेकिन मंदिर ही एक स्थान था जहां सभी समान माने जाते थे।

आज मंदिरों में भी वीआईपी व्यवस्था लागू हो गई है और यह देखा जा रहा है कि किसके पास पैसा है और कौन बिना पैसे के आया है। हमारा मानना है कि मंदिरों में वीआईपी दर्शन बंद होने चाहिए ताकि सभी श्रद्धालुओं के साथ समान व्यवहार हो और बिना भेदभाव के दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

मतदान प्रक्रिया पर उठाए सवाल
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने चुनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि हमारे हिंदू धर्म में यह नियम है कि हम जो भी कार्य करते हैं, उसमें धर्म और अधर्म का विचार करते हैं और यह देखते हैं कि हमारे कार्य से पाप होगा या पुण्य। मतदान के दौरान प्रत्येक व्यक्ति को मतदान करना पड़ता है, लेकिन हिंदू को यह विचार करना चाहिए कि मतदान करने से उसे पाप लगेगा या पुण्य।

क्योंकि यदि जिस व्यक्ति या पार्टी को वोट दिया गया, वह आगे चलकर गौ हत्या जैसे कार्यों को बढ़ावा देती है, तो उसका पाप उस व्यक्ति को भी लगेगा जिसने उसे वोट देकर जिताया है। इसलिए हिंदू को यह विचार करना चाहिए कि मतदान करके वह किसी पाप का भागीदार न बने।