वॉशिंगटन। भारत और यूरोपीय संघ ने शनिवार 27 जनवरी को ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस ट्रेड डील को होने से रोकने के लिए अमेरिका ने पूरी कोशिश की थी। ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने यहां तक कहा कि यूरोप अपने खिलाफ युद्ध की फंडिंग कर रहा है।
आखिरकार भारत और यूरोप ने अमेरिकी दबाव के आगे झुकने से इनकार किया और इस समझौते को अमली जामा पहना दिया। लेकिन अमेरिका को यह बर्दाश्त नहीं हो रहा है।
डील के बाद ट्रंप प्रशासन ने एक बार फिर भारत को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ट्रंप के व्यापार प्रतिनिधि ने रूसी तेल खरीद को लेकर बयान दिया और कहा कि अमेरिका की चिंताओं को दूर करने के लिए भारत को और काम करने की जरूरत है।
ट्रंप के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि वॉशिंगटन अभी भी भारत की रूसी तेल खरीद पर नजर रख रहा है। इसका मतलब है कि ट्रंप प्रशासन का भारत के खिलाफ लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को जल्द हटाने का इरादा नहीं है।
ग्रीर का यह बयान ट्रंप के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के दावोस में दिए बयान से बिल्कुल उलट है। बेसेंट ने कहा था कि रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत पर 25% टैरिफ लगाने के बाद भारतीय खरीदारी कम हो गई है।
ट्रंप प्रशासन का रूसी तेल पर यू-टर्न
बेसेंट ने तेल खरीदारी कम होने को बड़ी सफलता बताते हुए कहा था कि मुझे लगता है कि अब इन्हें हटाने का रास्ता है और यह एक अच्छी बात है। लेकिन अब ग्रीर ने इस मामले पर उलट बयान दिया है। यह साफ बता रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने अहंकारी रवैये के चलते भारत के साथ एक बेकार का गतिरोध पैदा कर लिया है। हाल ही में ट्रंप की पार्टी के सीनेटर टेड क्रूज के एक ऑडियो लीक से पता चलता है कि ट्रंप खुद भारत के साथ डील में बाधा बन रहे हैं।
अमेरिका का डबल स्टैंडर्ड आया सामने
पूर्व भारतीय राजनयिक कंवल सिब्बल ने रूस से तेल खरीद पर ग्रीर के बयान को डोनाल्ड ट्रंप का डबल स्टैंडर्ड बताया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, ट्रंप खुद को व्यापार और निवेश की संभावनाओं को देखते हुए रूस के साथ संबंध बना रहे हैं। वे चाहते हैं कि यूक्रेन रूस को रियायते दें लेकिन रूस पर दबाव बनाए रखने के लिए भारत का इस्तेमाल करना चाहते हैं। रूस से तेल के लिए हमारे दरवाजे बंद करवाना चाहते हैं क्योंकि हम कथित तौर पर युद्ध को फाइनेंस कर रहे हैं।

