केंद्र सरकार से जीएम सरसों हाइब्रिड के शीघ्र ही अनुमोदन मिलने की संभावना
नई दिल्ली। भारत दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आयातक देश बना और यहां औसतन 150 लाख टन से अधिक खाद्य तेल का वार्षिक आयात होता है जिस पर विशाल धनराशि खर्च होती है। इसको नियंत्रित करना अत्यन्त आवश्यक है।
सरकार उन्नत, आधुनिक एवं उपयोगी जैव तकनीक को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है जिससे देश में तिलहन उत्पादन को अच्छा प्रोत्साहन मिल सकता है। केन्द्र सरकार द्वारा जल्दी ही जीएम सरसों हाइब्रिड के व्यावसायिक उत्पादन की अनुमति दी जा सकती है।
शुरूआती दौर में इसके लिए कुछ सख्त नियम लागू हो सकते हैं और जैव सुरक्षा, पर्यावरण तथा मिटटी पर पड़ने वाले इसके संभावित प्रभाव पर गहरी नजर रखी जा सकती है ताकि कहीं किसी तरह के नुकसान की आशंका न रहे।
वनस्पति तेल-तिलहन उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र की एक अग्रणी संस्था- सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के अनुसार ऐसी सूचना मिल रही है कि भारत सरकार जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) सरसों की हाइब्रिड प्रजाति को स्वीकृति देने के काफी करीब पहुंच गई है।
यदि इसे मंजूरी देने का निर्णय लिया जाता है तो देश की वृद्धि जैव-तकनीक नीति में यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। लेकिन इस प्रस्तावित स्वीकृति पर पर्यावरण हितैषी संगठनों की कैसी प्रतिक्रिया सामने आती है यह देखना आवश्यक होगा।
व्यापक स्तर पर जैव सुरक्षा का गहन अध्ययन- आंकलन किया जा रहा है और फील्ड परीक्षण पर गहरी नजर रखी जा रही है। इसके अलावा ऊंची उपज दर, रोगों-कीड़ों से बचाव तथा बेहतर तेल रिकवरी जैसे मुद्दों पर भी ध्यान केन्द्रित किए जाने की संभावना है।
एसोसिएशन का कहना है कि यदि जीएम सरसों हाइब्रिड के व्यावसायिक उत्पादन की अनुमति दी जाती है तो इससे देश में तिलहनों की औसत उपज दर को सुधारने में अच्छी सहायता मिलेगी।
इसकी सख्त जरूरत भी है। तिलहनों की उपज-दर एवं पैदावार में बढ़ोत्तरी होने पर विदेशी खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता घटाना संभव हो सकेगा।सरकार का यह कदम सतर्कता का संकेत देता है लेकिन साथ ही साथ नीति निर्माताओं की प्रगति शील सोच को भी दर्शाता है।

