ब्रसेल्स/नई दिल्ली। India-EU Trade Deal: भारत को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के अड़ियल रवैयों के बीच भारत दुनिया का सबसे बड़ा ट्रेड डील करने के काफी करीब पहुंच गया है। भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच जो व्यापार समझौते पर बात चल रही है, वो फाइनल होने से सिर्फ चंद कदम दूर है।
भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने गुरुवार को कहा है कि भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच ट्रेड डील को लेकर 24 में से 20 चैप्टर पर साइन कर लिए गये हैं। उन्होंने कहा कि लक्ष्य इस महीने के आखिर में EU नेताओं के भारत आने से पहले डील को पूरा करना है।
आपको बता दें कि यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत में इस साल होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। वे 27 जनवरी को 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भी करेंगे। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इसकी औपचारिक घोषणा की है।
कॉमर्स सेक्रेटरी अग्रवाल ने पत्रकारों से कहा कि “हम पिछले तीन महीनों से EU के साथ बातचीत के आखिरी और सबसे मुश्किल दौर में थे। अब हम बहुत करीब हैं। हमने 24 में से 20 चैप्टर पूरे कर लिए हैं। कुछ मुद्दे हैं जिन पर बातचीत चल रही है।
हम लगभग रोजाना बातचीत कर रहे हैं। हम यह देखने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या हम अपने नेताओं की मुलाकात से पहले टाइमलाइन पूरी कर सकते हैं।”
डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने भारत और यूरोपीय संघ, दोनों को जल्द से जल्द व्यापार समझौते पर पहुंचने के लिए मजबूर कर दिया है। नई दिल्ली ने पिछले साल यानि 2025 में तीन ट्रेड डील फाइनल किए थे। वहीं, EU ने दक्षिण अमेरिकी ट्रेड ब्लॉक Mercosur के साथ एक लंबे समय से अटकी डील पर साइन किए हैं।
लेकिन अगर भारत और EU के बीच ट्रेड डील पर दस्तखत हो जाते हैं तो ये दुनिया के सबसे बड़े ट्रेड डील में से एक होगी। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस व्यापार समझौते से अमेरिका ने जो भारत पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगा रखा है, उसका असर कुछ हद तक कम हो जाएगा। इंडियन एक्सप्रेस ने एक सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा है कि दोनों तरफ से संवेदनशील कृषि मुद्दे, बातचीत से बाहर हैं।
अभी तक भारत और ईयू के बीच होने वाली बातचीत में कार्बन टैक्स, व्हिस्की और ऑटोमोबाइल जैसे संवेदनशील मुद्दे बड़ी चुनौतियां थीं। इनपर अभी भी बातचीत जारी है। जर्मनी, जो EU में ऑटोमोबाइल का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है, वो भारत में मार्केट एक्सेस के लिए प्रेशर डाल रहा है।
हालांकि, नई दिल्ली का ऑटोमोबाइल सेक्टर भी तेजी से बढ़ रहा है, जो सबसे ज्यादा रोजगार देने वाले सेक्टर्स में से एक है। भारत के लिए दिक्कत अमेरिकी टैरिफ है।
भारत काफी बेसब्री से नया बाजार तलाश रहा है। इसीलिए पिछले साल नवंबर में, कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्ट्री ने ट्रेड डील पर काम कर रहे अधिकारियों से छुट्टी न लेने का आग्रह किया था।

