नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में आए संकट के कारण भारत के सामने तेल और गैस की समस्या खड़ी हो गई है। हालांकि इसे दूर करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं, लेकिन परेशानी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार मार्च महीने में भारत के एलपीजी (LPG) आयात में जनवरी और फरवरी की तुलना में 40% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।
शिप ट्रैकर केप्लर (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक मार्च में भारत का कुल एलपीजी आयात घटकर 1.22 मिलियन टन रह गया। इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक यह जनवरी की तुलना में 46% और फरवरी की तुलना में 40% कम है। हालांकि इस कमी को पूरा करने के लिए अमेरिका और करीब 7 साल बाद ईरान से हुई सप्लाई ने ‘संकटमोचक’ की भूमिका निभाई है।
दूसरे देशों से आ रही सप्लाई
- मार्च में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा। अमेरिका से 4.20 लाख टन गैस आई, जो जनवरी के मुकाबले 56% अधिक है।
- करीब 7 साल बाद ईरान से 43,000 टन एलपीजी की खेप भारत पहुंची है।
- यूएई, कतर, कुवैत और सऊदी अरब, जो भारत के टॉप सप्लायर रहे हैं, उनसे होने वाली सप्लाई में भारी गिरावट आई है।
- यूएई से होने वाला आयात जनवरी के स्तर से गिरकर महज 28% रह गया है।
सरकार द्वारा उठाए गए कदम
भारत अपनी एलपीजी खपत का लगभग 60% आयात से पूरा करता है। आयात में आई इस बड़ी कमी से निपटने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं:
- मार्च के मध्य तक घरेलू एलपीजी उत्पादन में लगभग 40% की बढ़ोतरी की गई।
- तेल मंत्रालय ने रिफाइनरियों को निर्देश दिया था कि वे पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन के बजाय हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम को एलपीजी प्रोडक्शन की ओर मोड़ें।
- अब फार्मास्यूटिकल्स, फूड और केमिकल सेक्टर से मांग बढ़ने के कारण सरकार इस व्यवस्था को धीरे-धीरे सामान्य कर रही है।

