USCC भारत की अमेरिका और चीन के साथ रणनीतिक संबंधों पर सुनवाई करेगा
नई दिल्ली। अमेरिका-चीन आर्थिक और सुरक्षा समीक्षा आयोग (USCC) ने घोषणा की है कि वह अगले महीने भारत की अमेरिका और चीन के साथ रणनीतिक संबंधों पर एक महत्वपूर्ण सुनवाई आयोजित करेगा। यह सुनवाई 17 फरवरी को होगी और यह 2026 रिपोर्टिंग साइकिल की पहली सार्वजनिक सुनवाई होगी।
आयोग का उद्देश्य अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता के संदर्भ में भारत की स्थिति का आकलन करना है, जहां वाशिंगटन चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और चीन के रिश्तों में एक ‘नपा-तुला सुधार’ देखा जा रहा है।
मुख्य रूप से इन मुद्दों पर चर्चा होगी
- सीमा विवाद और समुद्री पहुंच: भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव और हिंद महासागर में बढ़ती समुद्री प्रतिस्पर्धा।
- भारत की भूमिका: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख सुरक्षा प्रदाता के रूप में भारत की उभरती सैन्य ताकत का आकलन।
- चीन के प्रति भारत का नरम रुख: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सात साल बाद हुई बीजिंग यात्रा, पांच साल बाद फिर से शुरू हुई हवाई सेवा और गलवान संघर्ष के बाद चीनी निवेश पर लगी पाबंदियों में दी गई ढील पर अमेरिकी नीति निर्माता अपनी नजर बनाए हुए हैं।
- आयोग केवल सैन्य पहलुओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई क्षेत्रों में भारत की प्रगति और चीन के साथ उसके व्यापारिक रिश्तों की भी जांच करेगा
- महत्वपूर्ण तकनीक: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर्स।
- सप्लाई चेन: फार्मास्युटिकल (दवा) क्षेत्र में आत्मनिर्भरता।
अमेरिका के लिए सुनवाई का महत्व
पिछले एक दशक में वाशिंगटन ने भारत को चीन के खिलाफ एक ‘रणनीतिक काउंटरवेट’ (संतुलन बनाने वाली शक्ति) के रूप में देखा है। हालांकि, पिछले एक साल के दौरान भारत और अमेरिका के बीच कुछ तनाव भी देखे गए हैं। अमेरिकी नीति गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि भारत अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ को बनाए रखते हुए अमेरिकी सुरक्षा ढांचे के साथ कितना तालमेल बिठा पाएगा। यह सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके ठीक छह सप्ताह बाद, अप्रैल 2026 में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन की आधिकारिक यात्रा पर जाने वाले हैं।

