तेहरान। भारत और ईरान के बीत तेल व्यापार कथित तौर पर फिर से शुरू हो गया है। ईरान से गुजरात के वाडिनार में कच्चे तेल के आगमन के संकेत मिले हैं। यह 2019 के बाद ईरान से भारत को भेजा गया पहला शिपमेंट होगा। ईरान युद्ध के बाद तेल पर अमेरिका की ओर से गई 30 दिन की प्रतिबंधों में छूट के कारण यह संभव हुआ है। भारत ने सात साल पहले ईरान से तेल लेना बंद कर दिया था लेकिन हालिया संकट के बाद यह फिर से शुरू हुआ है।
ईरान से ऐसे समय ये शिपमेंट आ रही है, जब भारतीय रिफाइनरियां घटते स्टॉक और रूस से आपूर्ति में अनियमितता का सामना कर रही हैं। ईरान से एक बार फिर से भारत में तेल का आना भू-राजनीतिक तनाव के बीच दिल्ली-तेहरान तेल व्यापार के सावधानीपूर्वक फिर से शुरू होने की ओर इशारा करती है।
कमोडिटी मार्केट एनालिटिक्स फर्म Kpler के जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, एस्वातिनी का झंडा लगा टैंकर ‘पिंग शुन’ गुजरात के वाडिनार बंदरगाह आ रहा है। जहाज ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि इस टैंकर में 600,000 बैरल ईरानी कच्चा तेल है। इसे 4 मार्च को ईरान के खर्ग द्वीप पर टैंकर में भरा गया था। जहाज के 4 अप्रैल को वाडिनार पहुंचने की उम्मीद है।
विशेषज्ञ इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि यह टैंकर भारत की ओर बढ़ रहा है। तेल टैंकर अपनी मंजिल (डेस्टिनेशन) में बीच रास्ते में बदलाव करते रहते हैं। फिलहाल ईरानी तेल और उसे ले जाने वाले जहाजों पर से प्रतिबंधों में मिली छूट को देखते हुए ऐसी चालों की वास्तव में कोई जरूरत नहीं है। यानी इसका भारत आना तय माना जा रहा है।
युद्ध के चलते अमेरिका ने ईरानी तेल पर 30 दिनों की छूट देने का फैसला किया, जिसके बाद ‘पिंग शुन’ कच्चे तेल के साथ वाडिनार की ओर बढ़ा है। इससे सात साल बाद एक बार फिर से भारत और ईरान के बीच तेल व्यापार एक बार फिर पटरी पर लौटता हुआ नजर आ रहा है।
भारत-ईरान संबंध
Kpler में रिफाइनिंग और मॉडलिंग के मुख्य शोध विश्लेषक सुमित रितोलिया का कहना है कि भारत और ईरान के बीच तेल व्यापार एक बार फिर पटरी पर लौट आया है। ईरान युद्ध के बाद अमेरिका ने समुद्र में मौजूद ईरानी तेल पर 30 दिनों की छूट देने का फैसला किया, जिसके बाद ‘पिंग शुन’ कच्चे तेल के साथ वाडिनार की ओर बढ़ा है। मई 2019 के बाद यह पहली डिलीवरी है।
ईरान भारत को तेल की आपूर्ति करने वाला एक प्रमुख देश हुआ करता था लेकिन 2019 में नई दिल्ली ने ईरानी कच्चे तेल का आयात बंद कर दिया था। यह कदम तब उठाया गया जब डोनाल्ड ट्रंप के पहले प्रशासन ने तेहरान पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे और ईरानी कच्चे तेल के प्रमुख खरीदारों को दी गई प्रतिबंधों में छूट को समाप्त कर दिया था।

