अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में देश–विदेश के शिक्षाविदों ने रखे विचार
कोटा/जयपुर। भारत की ज्ञान परंपरा हजारों वर्षों से विज्ञान, दर्शन, समाज और जीवन मूल्यों की समृद्ध विरासत रही है। इस परंपरा को समझे बिना और आत्मसात किए बिना हम वास्तविक विकास की कल्पना नहीं कर सकते।
आईकेएस (इंडियन नॉलेज सिस्टम) पर विशेष जोर देते हुए कहा कि यह विचार कोटा विश्वविद्यालय की प्रो.डा. अनुकृति शर्मा ने एस एस जी पारीक महाविद्यालय तथा इंस्पिरा रिसर्च एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह में व्यक्त किए। संगोष्ठी के तकनीकी सत्रों में देश–विदेश से जुड़े शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने विकास, ज्ञान परंपरा और सामाजिक दायित्वों पर अपने शोध एवं विचार प्रस्तुत किए।
संगोष्ठी के समापन सत्र की मुख्य वक्ता कोटा विश्वविद्यालय की प्रो. अनुकृति शर्मा रहीं। अपने प्रभावशाली और विचारोत्तेजक संबोधन में उन्होंने विकसित भारत के निर्माण में आम जन की निर्णायक भूमिका को रेखांकित किया। प्रो. शर्मा ने कहा कि विकसित भारत केवल आर्थिक सूचकांकों से नहीं, बल्कि मूल्य आधारित समाज, सांस्कृतिक चेतना और नागरिक जिम्मेदारियों से आकार लेता है।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय, कोटा के कुलपति प्रो. निमित रंजन चौधरी रहे, जबकि समापन समारोह के मुख्य अतिथि आरपीएससी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. बी.एम. शर्मा रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में आर.ए. पोद्दार इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो. अनुराग शर्मा उपस्थित रहे।
इंस्पिरा रिसर्च एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. एस.एस. मोदी ने कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठियां शोधार्थियों को अपने शोध साझा करने का अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करती हैं।तत्पश्चात आयोजित तकनीकी सत्रों में कोसोवो, तुर्की, मलेशिया सहित विभिन्न देशों से वक्ताओं ने ऑनलाइन सहभागिता की।
संगोष्ठी के सचिव प्रो. रविकांत मोदी ने बताया कि दो दिनों में 80 शोधपत्रों का वाचन किया गया। इस अवसर पर इंस्पिरा अकादमिक एक्सीलेंस अवार्ड्स भी प्रदान किए गए। लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रो. बी.एम. शर्मा को तथा बेस्ट प्रिंसिपल अवार्ड डॉ. सीमा शर्मा को प्रदान किया गया।

