बैठक छोड़कर निकले कोटा ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट्स एसोसिएशन अध्यक्ष
कोटा। संभाग की सबसे बड़ी भामाशाह कृषि उपज मंडी में अव्यवस्थाओं और किसानों के शोषण को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। भारतीय किसान संघ की मांग पर जिला कलेक्टर के निर्देश पर एडीएम (प्रशासन) यादव की अध्यक्षता में मंडी समिति सभागार में यह महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी।
बैठक का मुख्य उद्देश्य भारतीय किसान संघ द्वारा उठाए गए ज्वलंत मुद्दों का समाधान करना था, लेकिन चर्चा के दौरान माहौल तब गरमा गया जब मंडी समिति अध्यक्ष अविनाश राठी किसानों की जायज मांगों पर उबल पड़े।
देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि मंडी अध्यक्ष और किसान प्रतिनिधियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। जिसके बाद अध्यक्ष राठी बैठक को बीच में ही छोड़कर चले गए। किसानों ने उनके इस व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की है। भारतीय किसान संघ ने मंडी प्रशासन पर व्यापारियों के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है।
बैठक में भारतीय किसान संघ और अन्य किसान संगठनों के पदाधिकारियों ने मंडी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। संगठन की ओर से जिला अध्यक्ष जगदीश शर्मा “कलमंडा”, प्रदेश महिला प्रमुख रमा शर्मा, जिला महामंत्री रूपनारायण यादव, प्रांत प्रचार प्रमुख आशीष मेहता, जिला उपाध्यक्ष अश्विनी जैन, महानगर अध्यक्ष ब्रजराज नागर, धन्नालाल प्रजापत, कमलेश और बाबूलाल शर्मा ने पुरजोर तरीके से पक्ष रखा।

साथ ही राष्ट्रीय किसान संघ के एडवोकेट जगदीश शर्मा और हाड़ौती किसान यूनियन के दशरथ शर्मा ने भी किसानों की पीड़ा साझा की। किसान नेताओं ने एडीएम के समक्ष साक्ष्य रखते हुए बताया कि मंडी में 700 ग्राम प्रति बोरी की तुलाई के नाम पर प्रत्येक बोरी पर 200 से 300 ग्राम अतिरिक्त अनाज तौला जा रहा है। जो सीधे तौर पर किसानों की जेब पर डाका है।
इसके अलावा, निर्धारित हम्माली और तुलाई राशि के अतिरिक्त व्यापारियों द्वारा महिला कर्मचारियों के नाम पर 2 रुपए प्रति बोरी की अवैध वसूली की जा रही है। जिसकी एंट्री गुप्त रूप से पर्ची के पीछे की जाती है।
इस दौरान चर्चा का एक प्रमुख बिंदु धर्मकांटों पर तुलाई की मांग रहा। किसान प्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि वर्तमान में इलेक्ट्रॉनिक कांटों पर हो रही तुलाई के कारण बम्पर आवक के समय किसानों को दो से तीन दिन तक मंडी में खड़ा रहना पड़ता है। जिससे उन्हें वाहन के भारी भाड़े और अन्य खर्चों के कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
राजस्थान सरकार की नीति का हवाला देते हुए मांग की गई कि किसानों की उपज की बोली उनके वाहनों पर ही लगाकर सीधे धर्मकांटे पर तुलाई करवाई जाए ताकि समय और धन की बचत हो सके। इसी दौरान जब अवैध वसूली और धर्मकांटे के मुद्दे पर जवाब मांगा गया, तो मंडी अध्यक्ष अविनाश राठी किसानों पर ही भड़क गए और समाधान देने के बजाय बहस करने लगे।
वे मंडी में पुरानी पद्धति के अनुसार तीन टांग की घोड़ी लाने की बात करने लगे। राठी के वॉकआउट के बाद भी बैठक जारी रही। जिसमें मंडी सचिव मनोज मीणा, हमाल यूनियन और चढ़ारी यूनियन के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।
इसके बाद भारतीय किसान संघ की ओर से दिए गए ज्ञापन में सुल्तानपुर कृषि उपज मंडी की बदहाली का मुद्दा भी उठाया गया है। किसानों ने कहा कि सचिव और सहायक कर्मचारियों की कमी के कारण बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी हो रही है और व्यापारी किसानों को ‘कच्ची पर्ची’ पर बिल बनाकर दे रहे हैं। जिससे सरकार को राजस्व की भारी हानि हो रही है।
मंडी परिसर में बुनियादी सुविधाओं जैसे नालियों, शौचालय और मूत्रालय की सफाई न होने पर भी गहरा रोष व्यक्त किया गया। बैठक में टीन शेड बढ़ाने, शेड से व्यापारियों के अतिक्रमण हटाने और समय रहते जिंस उठाव के व्यापक व्यवस्थाएं करने की बात भी कही।
आगामी रबी सीजन की आवक को देखते हुए भारतीय किसान संघ ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते धर्मकांटे पर तुलाई शुरू नहीं हुई और समर्थन मूल्य केंद्रों पर छाया, पानी व रोशनी जैसी व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की गईं, तो प्रशासन की जिम्मेदारी पर उग्र आंदोलन किया जाएगा।

