भामाशाह अनाज मंडी में किसान की मौत प्रशासनिक संवेदनहीनता का परिणाम

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भारतीय किसान संघ ने जताया आक्रोश, पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग

कोटा। हाड़ौती क्षेत्र के अन्नदाता के साथ हो रहे अन्याय और प्रशासनिक अकर्मण्यता के कारण भामाशाह अनाज मंडी में एक किसान की असामयिक मृत्यु ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। भारतीय किसान संघ ने इस घटना पर गहरा दुख प्रकट करते हुए इसे ‘प्रशासनिक हत्या’ करार दिया है।

संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि समय रहते प्रशासन ने किसानों की जायज मांगों पर ध्यान दिया होता, तो आज एक परिवार का सहारा नहीं छिनता। इस घटना को लेकर किसानों में भारी रोष व्याप्त है और उन्होंने चेतावनी दी है कि अब आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।

भारतीय किसान संघ के संभाग अध्यक्ष गिरीराज चौधरी और जिला अध्यक्ष जगदीश चौधरी ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि संगठन ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, जिला कलेक्टर और प्रदेश के ऊर्जा मंत्री को काफी समय पहले ही वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया था।

उन्होंने बताया कि उपज की खरीद में क्वालिटी मानकों को लेकर आ रही समस्याओं और उसमें दी जाने वाली छूट की अनिवार्यता को लेकर बार-बार चेताया गया था। पदाधिकारियों ने कहा कि हाड़ौती का किसान पहले ही मौसम की मार और आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही ने जलती आग में घी डालने का काम किया है।

संगठन के प्रांत प्रचार प्रमुख आशीष मेहता ने तीखे शब्दों में कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि कंपनियों की मनमानी के आगे सरकारी तंत्र बौना साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए थे कि किसानों को किसी भी सूरत में परेशान न किया जाए और खरीद प्रक्रिया में लचीलापन अपनाया जाए।

इसके बावजूद, धरातल पर बैठे अधिकारियों और एफसीआई जैसी कंपनियों ने इन निर्देशों को पूरी तरह से धता बता दी। प्रशासन की इस हठधर्मिता के कारण किसान दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। जिसका परिणाम आज एक किसान की मौत के रूप में सामने आया है।

कंपनियों की मनमानी और जवाबदेही पर उठे सवाल

भारतीय किसान संघ ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की जाए और दोषी अधिकारियों व कंपनियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो। संगठन ने स्पष्ट किया है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा; मृतक किसान के परिवार को उचित मुआवजा और दोषियों को सजा दिलवाना प्राथमिकता है।

प्रशासन को आगाह करते हुए संघ ने कहा है कि यदि अब भी रवैये में सुधार नहीं हुआ और किसानों को फसल बेचने में राहत नहीं दी गई, तो भारतीय किसान संघ उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।