कोटा। पाटनपोल स्थित शुद्धाद्वैत प्रथम पीठ श्री बड़े मथुराधीश मंदिर में शुक्रवार को श्रीराम नवमी का पावन पर्व अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के प्राकट्योत्सव की खुशी में मंदिर परिसर ‘मथुराधीश प्रभु’ और ‘जय श्री राम’ के जयकारों से गुंजायमान रहा। सुबह से ही भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था, जो देर शाम तक अनवरत जारी रहा।
इस दौरान ठाकुर जी के स्वरूप शालिगराम जी के पंचामृत दर्शन हुए। प्रथम पीठ की परंपरा के अनुसार, मध्याह्न काल में शालिगराम जी को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से दिव्य स्नान कराया गया। युवराज मिलन बावा के सान्निध्य में संपन्न हुए इन दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में वैष्णव जन उमड़े। पुष्टिमार्ग में श्रीराम अवतार को ‘पुष्टिलीला’ का अभिन्न अंग माना जाता है। यही कारण है कि मंदिर में इस दिन का विशेष श्रृंगार और भोग का क्रम देखते ही बन रहा था।
दर्शनों का बदला क्रम, शयन के दर्शन रहेगें बन्द
सुबह मंगला के दर्शन निर्धारित समय पर खुले। जिसके बाद मध्याह्न उत्सव के विशेष दर्शनों के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। दोपहर के बाद राजभोग के दर्शनों में प्रभु का अलौकिक स्वरूप निहारने के लिए श्रद्धालु आतुर दिखे। शाम को उत्थापन और भोग-आरती के दर्शनों के साथ उत्सव का क्रम आगे बढ़ा। साथ ही, मंदिर प्रबंधन द्वारा यह महत्वपूर्ण सूचना भी साझा की गई कि चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी से ऋतु परिवर्तन के कारण शयन के दर्शन बंद कर दिए गए हैं। अब कार्तिक कृष्ण पक्ष अष्टमी तक शयन के दर्शन नहीं खुलेंगे।

