कोटा। गणिनी आर्यिका शिरोमणि विशुद्ध मति माताजी एवं प्रज्ञा पद्मिनी पट्ट गणिनी आर्यिका विज्ञ मति माताजी ससंघ के सानिध्य में रविवार को तलवंडी स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में श्री भक्ताम्बर महामंडल विधान विधि-विधानपूर्वक, श्रद्धा और भक्ति भाव से संपन्न हुआ।
प्रातःकाल श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ विधान की विधिवत शुरुआत की गई। इसके पश्चात भक्ताम्बर विधान आरंभ हुआ, जिसमें भक्तामर स्तोत्र के प्रत्येक श्लोक के साथ अर्घ्य समर्पण किया गया। विधान के अंतर्गत कुल 48 अर्घ्य समर्पित किए गए, जो भक्तामर स्तोत्र के 48 श्लोकों का प्रतीक हैं।
जेके जैन ने बताया कि विधान की प्रक्रिया के अनुसार प्रत्येक अर्घ्य के समय देवाधिदेव की स्तुति, मंत्रोच्चार एवं संगीतमय पाठ किया गया। भक्तामर स्तोत्र का सामूहिक, लयबद्ध और भावपूर्ण गायन वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भरता रहा। इस दौरान देव, शास्त्र एवं गुरु की विधिवत पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ अर्जित किया।
श्री विज्ञ मति माताजी माताजी ससंघ के प्रवचन हुए, जिसमें उन्होंने भक्तामर विधान के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह विधान आत्मशुद्धि, संकट निवारण और आत्मकल्याण का प्रभावशाली साधन है। विधान में बड़ी संख्या में समाजजनों ने सहभागिता कर पुण्यार्जन किया।

