नई दिल्ली। लंदन हाई कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के बकाया लोन मामले में भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी की उस याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया, जिसमें उसने दृष्टिहीनता, अवसाद और जेल की बाध्यताओं के कारण अपने मुकदमे को स्थगित करने का अनुरोध किया।
जस्टिस साइमन टिंकलर ने कहा कि कैदी को किसी भी प्रकार की ‘महत्वपूर्ण क्षति’ का सामना नहीं करना पड़ेगा और 23 मार्च से शुरू होने वाले आठ दिवसीय मुकदमे के लिए उसे ‘‘समान अवसर’’ प्राप्त होगा। जस्टिस टिंकलर ने कहा, ‘दुर्भाग्यवश, मैं इस याचिका को नीरव मोदी द्वारा देरी करने के पैटर्न का हिस्सा मानता हूं।’
संघर्ष का सामना कर रहे नीरव मोदी
स्थगन याचिका के लिए मोदी की ओर से पेश हुए बैरिस्टर जेम्स किनमैन ने अपने मुवक्किल द्वारा सामना किए जा रहे ‘पूर्वाग्रह’ का मुद्दा उठाया, क्योंकि पिछले अक्टूबर में दक्षिण लंदन के एचएमपी थेम्साइड जेल से स्थानांतरित होने के बाद से उसे अदालती दस्तावेजों तक पहुंच प्राप्त करने में लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है।
क्या है मामला
नीरव (54) पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के साथ लगभग दो अरब अमेरिकी डॉलर के धोखाधड़ी और धन शोधन मामले में भारत प्रत्यर्पित किए जाने का विरोध कर रहा है। वह उत्तरी लंदन की एचएमपी पेंटनविले जेल से वीडियोलिंक के माध्यम से 80 करोड़ अमेरिकी डॉलर के बैंक ऑफ इंडिया के अलग मामले में मुकदमा पूर्व समीक्षा के लिए पेश हुआ।

