नई दिल्ली। बेमौसम बारिश से मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, असम, कर्नाटक समेत कई राज्यों में किसानों को बड़ा झटका लगा है। केंद्र सरकार के मुताबिक केवल गेहूं की ही 2 लाख 49 हजार हेक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी है। अभी 15 अप्रैल तक मौसम खराब रह सकत है।
देशभर में बेमौसम बारिश और ओले गिरने की घटनाएं इस समय किसानों के पर आफत बनकर टूटी है। किसानों की खेतों में पड़ी खड़ी फसल इस प्राकृतिक आपदा से धराशायी हो रही हैं। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया है कि अब तक करीब 2.49 लाख हेक्टेयर में रबी फसलें खराब हो चुकी हैं। सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं को हुआ है। जबकि, आम और लीची जैसी बागवानी फसलें भी प्रभावित हुई हैं। नुकसान का आकलन अभी जारी है और तीन विभाग मिलकर सर्वे कर रहे हैं।
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार 2 से 8 अप्रैल के बीच देश के कई हिस्सों में भारी बारिश, आंधी और ओलावृष्टि हुई है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, असम, कर्नाटक समेत कई राज्यों में इसका असर देखने को मिला। यही नहीं, 9 से 15 अप्रैल तक और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
सरकार ने खाद पर बढ़ाई सब्सिडी
इस बीच सरकार ने साफ किया है कि वह किसानों के साथ खड़ी है और राहत के उपाय किए जा रहे हैं। खरीफ सीजन से पहले फर्टिलाइजर्स की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए सब्सिडी बढ़ाकर ₹41,534 करोड़ कर दी गई है। साथ ही AgriStack आधारित सिस्टम से खाद बांटने की योजना भी लागू की जा रही है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को समय पर संसाधन मिल सकेंगे।
रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन की उम्मीद
बेमौसम बारिश और गर्मी के बावजूद इस बार देश में गेहूं उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है। इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च के महानिदेशक मंगीलाल जाट के मुताबिक भारत का गेहूं उत्पादन इस साल 119 मिलियन टन से ज्यादा रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 117.94 मिलियन टन से अधिक होगा। अभी तक करीब 40% फसल की कटाई हो चुकी है और हरियाणा-पंजाब जैसे प्रमुख राज्यों में भी उत्पादन बढ़ने की उम्मीद जताई गई है।
केंद्र सरकार ने 2025-26 के लिए गेहूं उत्पादन का लक्ष्य 121 मिलियन टन रखा है, जो पिछले साल से करीब 2% ज्यादा है। भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है और देश में करीब 33.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की खेती होती है। वैज्ञानिकों के अनुसार फरवरी के अंत से बढ़ते तापमान को इस मौसम ने कम कर दिया, जिससे फसल को फायदा हुआ। ठंडे तापमान की वजह से गेहूं की दाना भरने की प्रक्रिया को ज्यादा समय मिला, जिससे उत्पादन बेहतर होने की संभावना बढ़ गई है।

