मुम्बई। पिछले कुछ महीनों से एक निश्चित सीमा में स्थिर रहने के बाद जीरा के वायदा मूल्य में अब सुधार आने के संकेत मिल रहे हैं क्योंकि एक तो ऊंझा मंडी में इसकी आवक कम हो रही है दूसरे गुजरात तथा राजस्थान में बिजाई में देर हो रही है। इसके फलस्वरूप आगामी फसल की कटाई-तैयारी में विलम्ब होने की संभावना है।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस वर्ष जीरा के बिजाई क्षेत्र में कमी आ रही है जिससे दिसम्बर में इसका वायदा भाव कुछ और बढ़ सकता है।
एक अग्रणी विश्लेषक के मुताबिक पिछले महीने की तुलना में नवम्बर के दौरान अब तक जीरा के दाम में 9 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हो चुकी है। राजस्थान और गुजरात के अनेक महत्वपूर्ण उत्पादक इलाकों में मौसम की हालत अनुकूल नहीं होने तथा बिजाई की रफ्तार धीमी रहने से कीमतों में मजबूती आने लगी है।
जीरा रबी सीजन के दौरान उत्पादित होने वाला एक प्रमुख मसाला है। इसकी बिजाई आमतौर पर मध्य अक्टूबर से आरंभ होती है जबकि फरवरी-मार्च से नई फसल की कटाई-तैयारी शुरू हो जाती है।
इस बार खेतों की मिटटी में नमी का अंश ज्यादा होने से किसानों को जीरे की बिजाई की रफ्तार बढ़ाने में सफलता नहीं मिल रही है। अब धीरे-धीरे बिजाई की स्थिति सुधरने लगी है।
राष्ट्रीय स्तर पर जीरा का सकल उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 11.70 लाख हेक्टेयर से घटकर इस वर्ष 10 लाख हेक्टेयर के आसपास सिमट जाने का अनुमान है क्योंकि मौसम की प्रतिकूल स्थिति के अलावा इसका बाजार भाव भी किसानों के लिए आकर्षक नहीं रहा जिससे वे अन्य ऊंचे दाम वाली फसलों की खेती को प्राथमिकता दे सकते हैं।
पिछले साल की तुलना में इस वर्ष जीरा का दाम नीचे रहा और किसानों को कम आमदनी प्राप्त हुई। राजस्थान और गुजरात में जीरा उत्पादकों का रुझान इस बार चना तथा सरसों की तरफ बढ़ने की उम्मीद है।
लग्नसरा एवं मांगलिक उत्सवों का सीजन होने से जीरा की घरेलू मांग मजबूत रहने की संभावना है जिससे आगामी सप्ताहों के दौरान इसके दाम में 100-150 रुपए प्रति क्विंटल तक की तेजी आ सकती है। नवम्बर से जनवरी के बीच देश में करीब 46 लाख शादी होने वाली हैं जिससे जीरा का बेहतर कारोबार होने के आसार हैं।
कुल मिलाकर बाजार की धारणा सकारात्मक है। पैकिंग युक्त मसाला मिक्स पर जीएसटी की दर को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत नियत किए जाने से भी जीरा सहित अन्य मसालों की मांग बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।

