बस अग्निकांड: नॉन ऐसी बस को दे दिया एसी बस का रजिस्ट्रेशन, डीटीओ निलंबित

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जैसलमेर। यहां पिछले दिनों हुए भीषण बस अग्निकांड के बाद अब नए खुलासे लगातार सामने आ रहे हैं। इस हादसे ने न सिर्फ 21 जिंदगियों को लील लिया, बल्कि परिवहन विभाग की लापरवाहियों और फर्जीवाड़ों की पोल भी खोल दी है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस बस में आग लगी थी, उसका रजिस्ट्रेशन चित्तौड़गढ़ जिला परिवहन कार्यालय में नॉन-एसी बस के रूप में हुआ था, लेकिन बस मालिक ने नियमों की अनदेखी कर उसे एसी बस में मॉडिफाई करवा लिया था।

मंगलवार (14 अक्टूबर) को जैसलमेर से कुछ ही दूरी पर एक निजी स्लीपर बस (RJ 09 PA 8040) में लगी आग ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। हादसे में महिलाएं और बच्चे सहित 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई यात्री गंभीर रूप से झुलसे हैं।

अब इस घटना की जांच में एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) की भी एंट्री हो चुकी है। आरोप है कि कुछ अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर बस मालिक को फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया था।

राज्य सरकार के निर्देश के बाद चित्तौड़गढ़ जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने प्रादेशिक परिवहन अधिकारी (आरटीओ) कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में कई गंभीर खामियां सामने आईं। जांच में पाया गया कि बस का पंजीयन तो नॉन-एसी में हुआ था, लेकिन बिना अनुमति के उसमें एसी फिट करवा लिया गया। हैरानी की बात यह है कि इस बदलाव की भनक विभाग के किसी भी अधिकारी को नहीं लगी।

जिला परिवहन अधिकारी नीरज शाह ने बताया कि बस की बिलिंग 21 मई को हुई थी और तीन महीने में उसकी बॉडी तैयार हुई। उसके बाद 1 अक्टूबर को बस सड़क पर उतारी गई। मात्र 14 दिनों बाद, 14 अक्टूबर को यह हादसा हो गया। नीरज शाह ने कहा कि विभाग में बस का रजिस्ट्रेशन नॉन-एसी के रूप में ही दर्ज है, लेकिन उसके बाद मालिक ने क्या परिवर्तन किए, इसकी जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

राज्य सरकार ने इस पूरे मामले में सख्ती दिखाते हुए चित्तौड़गढ़ के डीटीओ सुरेंद्र सिंह गहलोत और सहायक प्रशासनिक अधिकारी चुन्नीलाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि नियमों की अवहेलना और लापरवाही के चलते निर्दोष लोगों की जान गई है, इसलिए दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

हादसे के बाद परिवहन विभाग ने बस मालिक की अन्य गाड़ियों की भी जांच शुरू कर दी है। अब प्रत्येक बस की फिटनेस, बॉडी स्ट्रक्चर और रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी पाया गया है कि बस बॉडी बिल्डर ने मानकों के अनुरूप वेंटिलेशन और सेफ्टी फीचर्स नहीं लगाए थे।