नई दिल्ली। Potato Price: उत्तर प्रदेश में एक बार फिर आलू किसानों की बदहाली चरम पर है। बंपर पैदावार के बाद भी किसानों को बाजार में उचित कीमत नहीं मिल पा रही है और मंहगे किराए के चलते कोल्ड स्टोरों में भी रखने की व्यवस्था नहीं बन पा रही है।
उत्तर प्रदेश के आलू बेल्ट कहे जाने वाले आगरा, फर्रुखाबाद, हाथरस, कन्नौज, फिरोजाबाद और इटावा में किसानों का हाल बदतर हो चला है। इन जिलों में किसानों को आलू की लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है और आगे कीमतें बढ़ने के आसार न देखते हुए कोल्ड स्टोरों में रखना भी भारी लग रहा है। किसानों को इस समय आलू की कीमत बामुश्किल 5 से 7 रूपये किलो मिल रही है जबकि मंहगे बीज-खाद को देखते हुए लागत ही 10 रूपये किलो पड़ रही है।
इस बार आलू की कुफरी, चिप्सोना, सिंदूरी व फ्राईसोना जैसी वैराइटी के बीज 2200 रूपये क्विंटल बिके थे जबकि खाद 1800 रूपये बोरी मिली। इन हालात में किसानों के लिए एक क्विंटल आलू की लागत 1000 रूपये से ज्यादा की पड़ रही है। अवध और पूर्वी उत्तर प्रदेश में कीमतों में गिरावट को देखते हुए किसान आलू की खोदाई तक नहीं कर पा रहे हैं। उनका कहना है कि 350 रूपये प्रतिदिन की मजदूरी देकर आलू की खोदाई करवाने के बाद लागत की आधी कीमत मिलना भी मुश्किल हो गया है।
भारतीय किसान यूनियन अवध क्षेत्र के पदाधिकारी उत्कर्ष तिवारी का कहना है कि किसानों के सामने कोल्ड स्टोरों में रखने का विकल्प भी नहीं बचा है। इसका बड़ा कारण आगे भी आलू की कीमतों को लेकर कोई भरोसा न दिखना है। वो कहते हैं कि कोल्ड स्टोर में 350 से 400 रूपये क्विंटल का भाड़ा देने के बाद लागत, ढुलाई वगैरा मिलाकर किसान को फायदा तभी होगा जब उसे दाम कम से कम 1700 से 2000 रूपये क्विंटल मिले।
तिवारी कहते हैं कि पैदावार, मांग और बाजार के हाल देखते हुए इसकी उम्मीद कम ही है कि इतने दाम मिलें। उनका कहना है कि तमाम दावों-वादें के बाद भी प्रदेश में आलू के उत्पादों के कारखाने नहीं लगे हैं लिहाजा किसानों के पास घाटा उठाने का अलावा कुछ बचता नहीं है।
बंपर पैदावार से कीमतों में गिरावट
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में इस बार आलू की बोआई करीब 7 लाख हेक्टेयर में की गयी थी जोकि देश भर के रकबे का करीब 30 फीसदी है। आलू की इस बार की अनुमानित पैदावार 270 लाख टन की है जोकि पिछले साल के मुकाबले करीब 20 लाख टन अधिक है। उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के कुल आलू उत्पादन का 50 फीसदी से ज्यादा इटावा, आगरा, कन्नौज, फर्रुखाबाद, हाथरस व फिरोजाबाद में ही होता है। अधिकारियों का कहना है कि इस बार पड़ोसी राज्यों में भी पैदावार अच्छी होने के चलते यूपी के आलू की बाहर मांग भी न के बराबर है जिसके चलते कीमतें खासी गिर चुकी हैं।

