कोटा। पुनरूत्थान विद्यापीठ केन्द्र कोटा द्वारा भारतीय विवाह संस्कार के प्रशिक्षण के लिए अपनी तरह का पहला शिविर स्वामी विवेकानन्द विद्यालय महावीर नगर तृतीय की शिशु वाटिका में आयोजित किया गया। कोटा महानगर से विवाह योग्य युवक-युवतियों वाले चयनित 30 परिवारों का पंजीयन कर एक दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया।
इस शिविर में प्लास्टिक का प्रयोग नहीं किया गया और शिविर पूर्णतया निशुल्क रहा। कार्यक्रम उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह प्रान्त कार्यवाह एवं परिवार प्रबोधन गतिविधि के पालक नरेन्द्र कंसूरिया द्वारा किया गया। नरेन्द्र कंसूरिया द्वारा प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्वति की विशेषताओं पर प्रकाश डाला गया। बीज भाषण नरेन्द्र कुमार शर्मा सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा किया गया।
पुनरूत्थान विद्यापीठ के पालक कार्यकर्ता राधेश्याम शर्मा ने विवाह के बारे में विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने नियम, संयम, आहार, विहार, ब्रह्मचर्य पालन करने हुए योग व्यायाम से शरीर को पुष्ठ बनाने और सद्साहित्य के अध्ययन का आव्हान किया।
विवाह की भारतीय और अभारतीय संकल्पना के गुणावगुण बताते हुऐ राजेन्द्र मोरपा द्वारा विवाह संस्कार की विधियों और सप्तपदी वचन विवाह के श्रेष्ठ प्रकारों को बताया। कार्यक्रम का संचालन यतीश विजयवर्गीय, रमा शर्मा, आयोध्या पारेता द्वारा किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं पुरूषों और विवाह योग्य युवक- युवतियों से चर्चा करते हुए डॉ. संस्कृति जैन और डॉ. नीलप्रभा नाहर, वैद्य अंजना शर्मा द्वारा युवतियों एवं युवकों के प्रश्नों और जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।
कार्यक्रम में आमंत्रित वैद्य नित्यानन्द शर्मा, प्राचार्य राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय कोटा द्वारा अच्छे स्वास्थ्य और यौवनावस्था के बारे में जानकारी दी गई। इस अवसर पर कुटुम्ब शिक्षा की भारतीय ज्ञानसागर ग्रन्थ माला की प्रदर्शनी का आयोजन नरेश प्रजापति और अनन्य शर्मा द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के समापन के अवसर पर पुनरूत्थान विद्यापीठ, पितामही विद्यापीठ के कार्यों के बारे में प्रकाश डालते हुऐ केन्द्र संचालक दीपक शर्मा ने पुनरूत्थान कार्य अपने संदेश पत्रिका और गृहगंगा पत्रिका का सदस्य बन कर परिवारों को संस्कारित करने एवं विघटन से बचाने की जानकारी दी। समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता रामविलास प्रान्त कुटुम्ब प्रबोधन संयोजक द्वारा की गई।

