डिमापुर। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि प्रवासी राजस्थानियों ने कर्मशीलता, समर्पण और संस्कारों से मातृभूमि को गौरवान्वित किया है। बिरला रविवार को डिमापुर में आयोजित प्रवासी राजस्थान व श्री मारवाड़ी सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। वे राष्ट्रमंडल संसदीय संघ भारत क्षेत्र सम्मेलन (सीपीए जोन 3) में भाग लेने नागालैंड पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि जब भी वे उत्तर पूर्व के दौरे पर आते है और राजस्थान के परिवार से मिलते हैं, तो उन्हें अपार प्रसन्नता होती है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के लोग जहाँ भी जाते हैं, वहाँ की संस्कृति को आत्मसात करते हुए अपनी मातृभूमि के संस्कारों को जीवंत रखते हैं और कर्म, सेवा तथा समर्पण की भावना से समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देते हैं।
बिरला ने कहा कि राजस्थानियों की पहचान मेहनत, ईमानदारी और कार्यनिष्ठा से बनी है। वे हर राज्य में रहकर न केवल अपनी पहचान बनाते हैं, बल्कि उस क्षेत्र के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कठिनाई या संकट की घड़ी में सेवा और सहयोग के साथ आगे बढ़ना राजस्थानियों की संस्कृति का हिस्सा है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि तमाम भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद पिछले पंद्रह वर्षों में यहाँ विकास के नए द्वार खुले हैं। आज नॉर्थ ईस्ट क्षेत्र रोड, एयर और रेल कनेक्टिविटी से देश के मुख्य भागों से सशक्त रूप से जुड़ रहा है।
बिरला ने कहा कि “विकसित भारत का सपना उत्तर पूर्वी राज्यो के बिना संभव नहीं है। यह के लोगों की कर्मशीलता, संघर्ष और राष्ट्रभावना पूरे देश के लिए प्रेरणादायी है।” उन्होंने कहा कि “भारत की असली शक्ति उसकी विविधता में एकता में है।
लोकतंत्र की यही ताकत है कि अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं के बावजूद हम सब एक सूत्र में बंधे हैं। दुनिया में वही देश आगे बढ़े हैं जहाँ लोकतंत्र सशक्त है।” कार्यक्रम में प्रवासी राजस्थानियों और विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने लोकसभा अध्यक्ष का आत्मीय स्वागत किया।

